'विवि परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती उचित नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को शिक्षण संस्थाओं के परिसरों में सुरक्षाकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को अस्वीकृत कर दिया। प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की खंडपीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की एक याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि परिसरों के अंदर अर्धसैनिक बलों का बने रहना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट ने दिया था आदेश
उच्च न्यायालय ने इस सप्ताह के शुरू में राज्य सरकार से उस्मानिया विश्वविद्यालय से रैपिड एक्शन फोर्स और अर्ध सैनिक बलों को हटाने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करने की आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही खंडपीठ में न्यायाधीश एसएच कापड़िया और न्यायाधीश आफताब आलम भी शामिल थे।
राज्य सरकार ने शीघ्र सुनवाई के लिए पेश याचिका में कहा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय पृथक तेलंगाना राज्य की मांग का केंद्र बना हुआ है और वहां से सुरक्षा बलों को हटाना राज्य में कानून और व्यवस्था के लिए ठीक नहीं होगा। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय परिसर से रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य अर्धसैनिक बलों की वापसी बुधवार से शुरू कर दी।
क्या यूपी के विश्वविद्यालयों से हटेंगे सुरक्षाबल?
सुप्रीम कोर्ट की यह संस्तुति ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अलीगढ़ विश्वविद्यालय समेत कई विश्वविद्यालयों के छात्रों ने कई बार यह मांग उठाई है। खास बात यह है कि यूपी के अधिकांश विश्वविद्यालय परिसरों में पीएसी के जवान हमेशा तैनात रहते हैं। अब देखना यह है कि यहां सुप्रीम कोर्ट की संस्तुति का कितना पालन होता है। हालांकि यहां किसी भी संगठन ने सुरक्षाबल हटाने की मांग कोर्ट के समक्ष नहीं रखी है।












Click it and Unblock the Notifications