काश! हम भी पुरुष होते

समाचार पत्र 'डेली एक्सप्रेस' के मुताबिक 15 प्रतिशत महिलाओं ने स्वीकार किया कि मासिक धर्म के तनाव के कारण जब उन्हें मानसिक व्याधियों से गुजरना पड़ता है, तब उन्हें पुरुष न होने का अफसोस होता है। नौ प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि अंदरूनी और बाहरी शारीरिक संरचना के मामले में पुरुष ज्यादा सहज महसूस करते हैं। 2048 महिलाओं पर कराए गए शोध से पता चला कि 12 प्रतिशत महिलाएं किसी भी हालत में गर्भधारण के लिए तैयार नहीं होती हैं।
87 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे जवानी की ओर कदम रखते वक्त अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर सहज नहीं होती हैं। कुल मिलाकर, महिलाओं को अपने स्त्रीत्व से प्यार है और इनमें से 36 फीसदी ने इसके लिए यह दलील दी है कि उन्हें अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की आजादी होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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