मिसाइल तकनीक में चीन से काफी पीछे भारत

Agni 3
बीजिंग। भारत ने हाल ही में 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-3 मिसाइल का पीरक्षण कर कितना ही बड़ा डंका क्‍यों न पीटा हो, लेकिन इसके बावजूद मिसाइल तकनीक के मामले में हम अपने पड़ोसी देश चीन से दशकों पीछे हैं। अगर चीन के सुरक्षा विशेषज्ञों की माने तो भारत को अपना प्रतिद्वन्‍द्वी नहीं मानते। यही नहीं उनका कहना है कि वो भारत से किसी भी प्रकार का खतरा भी नहीं महसूस करते हैं।

भारत को अभी पांच साल और लगेंगे

भारतीय मिसाइल अग्नि-3 के परीक्षण के बाद चीन भी भारत की जद में आ गया। लेकिन चीन को इसकी कोई परवाह नहीं। चीन के सुरक्षा विशेषज्ञ रियर एडमिरल और प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झांग झाओंझोंग ने कहा है कि भारत को यह क्षमता हासिल करने में पांच साल का समय और लगेगा।

अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' को दिए गए साक्षात्‍कार में उन्‍होंने खंडन किया है कि भारत इंटरसेप्टर मिसाइल तकनीक विकसित करने में चीन से आगे है। प्रोफेसर झाओंझोंग ने कहा है कि भारत चीन से मिसाइल तकनीक में अभी भी 10-15 साल पीछे है। इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है कि भारत की अग्नि-3 मिसाइल कब तक सेना में शामिल की जाएगी। रही बात अग्नि-4 की तो उसे विकसित करने में भारत को अभी पांच साल और लगेंगे।

भारत को अपना प्रतिद्वन्‍द्वी नहीं मानते

झांग ने कहा हथियारों और सैन्‍य तकनीक में चीन कभी भी भारत को अपना प्रतिद्वन्‍द्वी नहीं मानता है और न ही भारत को निशाना बनाने के लिए किसी विशेष हथियार का निर्माण किया है।

गौरतलब है कि हाल ही में अग्नि-3 के परीक्षण के बाद डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा था कि अग्नि-3 और अग्नि-4 के सफल परीक्षणों के बाद पाकिस्तान और चीन का कोई भी ऐसा शहर नहीं होगा, जो मिसाइल की जद से बाहर हो। सारस्वत के मुताबिक एक साल के भीतर भारत परमाणु आयुद्ध ले जाने और 5000 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता वाली अग्नि-4 का भी परीक्षण कर लेगा।

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