सज्जन कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज (लीड-2)
सत्र न्यायाधीश पी.एस. तेजी ने आरोपों को गंभीर मानते हुए यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मेरा मानना है कि आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।"
अदालत के इसी आधार को मामले के छह अन्य आरोपियों की जमानत याचिका भी खारिज कर दी।
इससे पहले दिन में, सीबीआई ने कहा था कि यदि सज्जन कुमार को अग्रिम जमानत मिल गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
सज्जन कुमार के पक्ष में उनके वकील आई. यू. खान ने तर्क दिया कि यह मामला कई वर्षो से चल रहा है लेकिन याचिकाकर्ता (सज्जन) ने कभी भी गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा, "इस संबंध में सज्जन कुमार के खिलाफ कोई शिकायत तक दर्ज नहीं है।"
दूसरी ओर सीबीआई के वकील वाई. के. सक्सेना ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और लोगों की भावनाओं से जुड़ा है।
वकील ने कहा, "यद्यपि सज्जन कुमार के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है कि गवाह डरे-सहमे हैं और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"
सीबीआई ने उदाहरण दिया कि उसे इस मामले में एक गवाह का बयान दर्ज करने के लिए अमृतसर जाना पड़ा। "उनका जुर्म बहुत बड़ा है और इस अवस्था में यदि उन्हें जमानत दे दी जाती है तो जांच प्रभावित हो सकती है।"
दिल्ली की एक अदालत ने इन मामलों में सज्जन कुमार व अन्य के खिलाफ गत एक फरवरी को नोटिस जारी किया था और उन्हें 17 फरवरी को अदालत में हाजिर होने को कहा था।
कुमार के खिलाफ गत 13 जनवरी को सीबीआई ने दो आरोप पत्र दाखिल किए थे। पहला आरोप पत्र दिल्ली छावनी इलाके में पांच लोगों की हत्या से संबंधित है जबकि दूसरा सुल्तानपुरी क्षेत्र में दंगों के दौरान हुई कई लोगों की हत्याओं से संबंधित है।
सीबीआई ने कुमार तथा अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किए थे, जिनमें हत्या, दंगे भड़काना और आपराधिक षडयंत्र रचने जैसे मामले शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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