पुणे बेकरी विस्फोट में 8 की मौत, 32 घायल (राउंडअप)

लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संदिग्ध आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने ओशो आश्रम के आसपास के इलाके का सर्वे किया था। यह इलाका जर्मन बेकरी से महज 200 गज की दूरी पर है। माना जा रहा है कि बेकरी विस्फोट एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें विदेशी नागरिक निशाने पर हो सकते हैं।

प्राथमिक जांच के मुताबिक इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के जरिये इस बम विस्फोट को अंजाम दिया गया जिसमें 5-7 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। विस्फोट शाम 7.30 बजे हुआ और यह इतना शक्तिशाली था कि इसकी आवाज दूर तक सुनी गई। विस्फोट होते ही पूरा बेकरी धू-धू कर जलने लगा।

नई दिल्ली में आपात बैठक के बाद गृह सचिव जी.के.पिल्लै ने कहा कि बेकरी के पास एक संदिग्ध वस्तु थी जिसे बेकरी के एक कर्मचारी ने जैसे ही खोलने का प्रयास किया उसमें विस्फोट हो गया।

पिल्लै ने कहा, "प्रथम दृष्टया यह आतंकी हमला प्रतीत होता है।" उन्होंने कहा कि अब तक की जानकारी के अनुसार विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में एक विदेशी नागरिक शामिल है।

इस विस्फोट की अगर आतंकी हमले के रूप में पुष्टि होती है तो मुंबई में 26/11 को हुए विस्फोट के बाद यह पहला बड़ा आतंकी हमला होगा।

संयुक्त पुलिस आयुक्त आर.सोनावाने ने संवाददाताओं से कहा कि यह संदिग्ध बम विस्फोट है। प्रथम दृष्टया यह बम विस्फोट प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए अभी किसी संगठन या व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा लेकिन जांच को आगे बढ़ाने के मद्देनजर पूछताछ के लिए बेकरी के एक खजांची को हिरासत में लिया गया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।

घायलों को शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें ससून, रूबी और जहांगीर अस्पताल शामिल है।

माना जाता है कि इस विस्फोट के निशाने पर विदेशी नागरिक हो सकते हैं। 22 साल पुरानी इस बेकरी में विदेशी नागरिकों का आना-जाना लगा रहता था। यहां से कुछ ही दूरी पर ओशो आश्रम स्थित है।

घटनास्थल पर दमकल की कम से कम पांच गाड़ियां आग बुझाने के काम में जुटी हुई हैं। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।

पुणे आतंकवाद निरोधक दस्ता और बम निरोधक दस्ता घटनास्थल पर पहुंच गई है मुंबई आतंकवाद निरोधक दस्ता पुणे के लिए रवाना हो चुकी है।

विस्फोट के तत्काल बाद बेकरी पूरी तरह आग की लपटों में घिर गई जिससे शुरू में यह संदेह व्यक्त किया गया कि संभवत: यह सिलेंडर विस्फोट हो।

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के फोरेंसिक विशेषज्ञों के एक दल को जर्मन बेकरी विस्फोट की जांच में मदद देने के लिए पुणे रवाना कर दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि जांच दल को पुणे भेज दिया गया है।

मंत्रालय की ओर से राज्यों को एक निर्देश जारी किया गया है कि उन्हें पुणे विस्फोट के मद्देनजर चौकस रहना चाहिए। लोगों से कहा गया है कि उन्हें किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए।

गृह सचिव जी.के.पिल्लै ने परिस्थिति की समीक्षा के लिए अपने आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक की।

पिल्लै का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संदिग्ध आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने ओशो आश्रम के आसपास के इलाके का सर्वे किया था। यह इलाका जर्मन बेकरी से महज 200 गज की दूरी पर है।

पिल्लई ने पुणे विस्फोट के मद्देनजर यहां आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं को बताया, "हेडली ने ओशो आश्रम का सर्वे किया था, जो कि जर्मन बेकरी से 200 गज की दूरी पर है। हमने 12 अक्टूबर 2009 को इस बारे में महाराष्ट्र सरकार को सूचित किया था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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