पुणे के अस्पतालों में मौत, आंसू और मातम
जर्मन नागरिक बुरी तरह परेशान था। पहले वह ससून जनरल अस्पताल गया था, जहां सभी नौ मृतकों के शव रखे हुए हैं। इनमें से छह भारतीयों के हैं। तीन की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस का मानना है कि उनमें से एक विदेशी महिला का शव हो सकता है।
उस जर्मन नागरिक ने अस्पताल परिसर में पत्रकारों से बातचीत करने से इंकार कर दिया। इसका एक कारण यह था कि वह टूटी-फूटी अंग्रेजी ही जानता था और दूसरा कारण यह था कि वह अपनी तलाश को जारी रखने के लिए दूसरे अस्पताल में जाना चाहता था।
एक वरिष्ठ चिकित्सक दीपा लाड ने कहा कि सरकारी ससून अस्पताल में शनिवार की शाम जर्मन बेकरी से 18 घायलों को लाया गया था। उनमें से दो को तत्काल छुट्टी दे दी गई थी।
10 घायलों को चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ एक अधिकारी के कहने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जबकि चिकित्सक महसूस करते थे कि उन्हें और चिकित्सा की जरूरत थी।
बाकी बचे छह घायलों में चार भारतीय थे और एक-एक नेपाल व ताईवान से थे।
मृतकों में छह को ससून अस्पताल ले जाया गया था। इनलैक्स बुधरानी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मृत हुए तीन अन्य के शव भी ससून अस्पताल में स्थानांतरित कर दिए गए।
एक छात्र ने अपनी पीड़ा को मुश्किल से रोकते हुए कहा, "हम अनाथ हो गए। हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी घटना घटेगी। इस पर तुर्रा यह कि शनिवार की शाम हमारी मोटरसाइकिल भी चुरा ली गई।"
लगभग 50 लोग अस्पताल परिसर में मौजूद थे। उनमें से ज्यादातर स्थानीय लोग थे। उनमें से कुछ लोग किसी तरह की मदद करने की इच्छा जाहिर कर रहे थे। कुछ मुट्ठी भर पुलिस कर्मी बम विस्फोट संबंधी अस्पताली औपचारिकताओं में व्यस्त दिखे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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