पिछले 40 वर्षो में कोई भी गैर सरकारी विधेयक पारित नहीं हुआ
नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)। संसद के आगामी बजट सत्र के ठीक पहले एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पिछले 40 वर्षो में देश की संसद में एक भी गैर सरकारी विधेयक पारित नहीं हो पाया है। सांसदों की तो छोड़िए मंत्रियों द्वारा लाए गए गैर सरकारी विधेयकों का भी यही हश्र हुआ है।
गैर सरकारी विधेयकों पर चर्चा के लिए संसद में समय का भी अभाव दिखा जबकि सांसद राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए इसे एक बेहद ही आवश्यक और महत्वपूर्ण हथियार मानते हैं।
पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च की ओर से किए गए एक शोध के अनुसार, "आज की तारीख तक सिर्फ 14 गैर सरकारी विधेयकों को ही संसद की मंजूरी मिल सकी है। सिर्फ 1956 में छह विधेयक संसद से पारित हुए। 1970 के बाद संसद में कोई भी गैर सरकारी विधेयक पारित नहीं हुआ है।"
लोकसभा में प्रत्येक शुक्रवार को शेष दो से ढाई घंटे का समय गैर सरकारी विधेयकों, गैर सरकारी विधायी कार्यो और गैर सरकारी प्रस्तावों के लिए आवंटित होता है।
कोई सांसद जो मंत्री नहीं है, को गैर सरकारी सदस्य कहा जाता है और उसके द्वारा लाए गए विधेयक को गैर सरकारी विधेयक कहा जाता है।
संसद में जो आखिरी गैर सरकारी विधेयक पारित हुआ, वह था सर्वोच्च न्यायालय विधेयक, 1968। नौ अगस्त 1970 को इस विधेयक ने कानूनी रूप लिया।
पिछली यानी 14वीं लोकसभा के दौरान संसद में कुल 300 गैर सरकारी विधेयक पेश किए गए लेकिन इनके चार फीसदी पर ही बहस हो पाई। 96 फीसदी विधेयकों पर कोई चर्चा ही नहीं हो सकी।
शोध के मुताबिक इस दौरान कुल 328 विधेयक लाए गए लेकिन सिर्फ 14 पर ही चर्चा हो सकी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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