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तेलंगाना : सरकार ने जनता को धोखा दिया

हैदराबाद। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने पृथक तेलंगाना मसले पर केंद्र सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्र को निराधार, निर्थक और नासमझ करार दिया है। टीआरएस ने घोषणा की है कि इस मसले पर उसके सभी सांसद और विधायक इस्तीफा देंगे।

तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और टीआरएस ने यह कहते हुए समिति के कार्यक्षेत्र को खारिज कर दिया है कि यह पृथक तेलंगाना के गठन के पक्ष में नहीं है। समिति के कार्यक्षेत्र में पृथक तेलंगाना की मांग का परीक्षण करने के साथ ही आंध्र प्रदेश की वर्तमान संयुक्त स्थिति को बनाए रखने की मांग का परीक्षण करने के लिए कहा गया है।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह समिति 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है।

तेलंगाना क्षेत्र से संबंध रखने वाले कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष डी.श्रीनिवास ने श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्र का स्वागत किया है, वहीं तेलंगाना समर्थक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जी.वेंकटस्वामी ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तेलंगाना के लोगों को निराश किया है। घोषित कार्यक्षेत्र के विरोध में संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने शनिवार को बंद का आह्वान किया है। इसे देखते हुए हैदराबाद और नौ अन्य जिलों में पुलिस को सतर्क कर दिया गया है।

पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय, विधानसभा, विश्वविद्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पिछले दो महीने से पृथक तेलंगान आंदोलन का केंद्र रहे उस्मानिया विश्वद्यिालय में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। टीआरएस के प्रमुख चंद्रशेखर राव ने कहा कि केंद्र ने तेलंगाना क्षेत्र की जनता को एक बार फिर से धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि टीआरएस श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्र को खारिज करती है।

महबूबनगर से सांसद राव ने कहा, "केंद्र सरकार ने एक बार फिर तेलंगाना की जनता को धोखा दिया है। हमें समिति के कार्यक्षेत्र मंजूर नहीं हैं। हम आंदोलन जारी रखेंगे और अपने इस्तीफे कबूल कराने के लिए दबाव बनाएंगे।"

राव ने कहा कि पार्टी के दोनों सांसद और सभी 11 विधायक इस्तीफा सौंपेंगे और उसे स्वीकार करने के लिए दबाव बनाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सहयोगी सांसद विजयशांति और वह लोकसभा अध्यक्ष को इस्तीफा देंगे। विधानसभा के सभी 10 सदस्य विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपेंगे जबकि विधान परिषद के एक सदस्य सदन के अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपेंगे।

सर्वदलीय तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) शुक्रवार देर शाम अथवा शनिवार सुबह को आपात बैठक करेगी, जिसमें कार्रवाई के संबंध में फैसला किया जाएगा। जेएसी ने कहा कि केंद्र की घोषणा ने जनता को निराश किया है। जेएसी के समन्वयक एम.कोदनदरम ने कहा कि आखिर केंद्र ने कैसे एकीकृत आंध्र प्रदेश और पृथक तेलंगाना की मांग को एक साथ पेश कर दिया।

क्षेत्र के कांग्रेसी नेता भी जेएसी की बैठक में अपनाए जाने वाले रुख पर निर्णय लेने के लिए एक अलग बैठक कर रहे हैं।
जहां तेदेपा विधायक संवैधानिक संशोधन के लिए सामूहिक इस्तीफा देना चाहते हैं, वहीं कांग्रेसी खेमें में इस मुद्दे पर दो मत है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि केंद्र ने एक बार फिर तेलंगाना मुद्दे को ठंडे बस्ते में रख दिया।

उधर संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की उस्मानिया विश्वविद्यालय इकाई के छात्रों ने शनिवार को तेलंगाना क्षेत्र में बंद का आह्वान किया है। जेएसी ने मांग रखी है कि श्रीकृष्णा समिति को तत्काल रद्द कर दिया जाए। जेएसी का कहना है कि पृथक तेलंगाना राज्य के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की मांग पूरी होनी चाहिए।

जेएसी ने लोगों से आंदोलन में सहयोग करने की अपील की। समिति के नेताओं ने कहा कि वे तेलंगाना क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालयों को बंद कर देंगे। जेएसी के बंद के आह्वान को काकतिया विश्वविद्यालय सहित कुछ अन्य विश्वविद्यालय के छात्र समूहों ने समर्थन दिया है। जेएसी की बंद की अपील के बाद उस्मानिया विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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