कंधमाल पहुँचे यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि

यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को सांप्रदायिक दंगों की आँच में झुलस चुके उड़ीसा के कंधमाल क्षेत्र का दौरा किया. प्रतिनिधिमंडल उन क्षेत्रों में गया जहाँ पिछले वर्ष सांप्रदायिक दंगों में कई लोगों की जानें गई थी.
यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल अपने उड़ीसा दौरे के दौरान इस बात का जायज़ा ले रहा है कि कंधमाल के दंगा प्रभावितों के लिए राहत और पुनर्वास कार्यक्रम में क्या प्रगति हुई है. गुरुवार को प्रतिनिधिमंडल के सदस्य नंदगिरि के राहत शिविर में पहुँचे जहाँ 30 से ज़्यादा दंगा प्रभावित परिवार रह रहे हैं.
राहत शिविर में जब इन लोगों का काफिला पहुँचा तो शिविर के लोगों ने गाजे-बाजे के साथ इनका स्वागत किया. इससे समझा जा सकता था कि शिविर में रहे रहे लोग प्रतिनिधिमंडल को लेकर कितने आशान्वित हैं.
शिविर में रह रही एक महिला ने कहा, "हम शिविर में बहुत बुरी स्थिति में रह रहे हैं. पुनर्वास के नाम पर कुछ को ज़मीन मिली है तो कुछ को वो भी नहीं. कुछ घरों के पुरुष बेवजह जेलों में बंद हैं. उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए ताकि वो नंदगिरि में अपने परिवारों के पास लौट सकें."
हालांकि प्रतिनिधिमंडल ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया पर एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि लोगों ने बातचीत में सरकार के राहत कार्यों के प्रति संतोष जताया है. नंदगिरि के अलावा प्रतिनिधिमंडल हाटपदा और केनवा गांव भी गया. ये इलाके भी सांप्रदायिक दंगों से बुरी तरह से प्रभावित हुए थे.
राहत और राजनीति
अपने दौरे के अंतिम दिन प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्रों के आला अधिकारियों से बातचीत करेगा और इसके बाद राजधानी दिल्ली वापस लौटेगा. वैसे अपने दौरे की शुरुआत से पहले ही प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को विवादों ने घेर लिया था. पहले प्रतिनिधिमंडल को फरवरी महीने में संभावित दौरे की अनुमति ही नहीं दी गई. बाद में जब केंद्र सरकार ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में अनुमति दी भी तो राज्य सरकार ने इसपर अपना विरोध जताया.
दरअसल, राज्य में अप्रैल महीने में चुनावों के मद्देनज़र राज्य सरकार प्रतिनिधिमंडल के दौरे को लेकर चिंतित थी पर बाद में केंद्र के आश्वासन के बाद दौरा संभव हो सका. वैसे सरकारी अनुमति के बाद भी विरोध का क्रम नहीं थमा. मंगलवार की शाम जब प्रतिनिधिमंडल उड़ीसा पहुँचा तो हिंदूवादी संगठनों के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन किया.












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