प्लास्टिक कचरे से हिमाचल में बन रही हैं सड़कें

कचरे के इस्तेमाल से तीन सड़कों के निर्माण में मिली सफलता से उत्साहित हिमाचल प्रदेश सरकार पिछले महीने चलाए गए अभियान के तहत जुटाए गए सभी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल अब सड़क निर्माण के लिए करेगी। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि राज्य में सप्ताह भर चले 'पॉलीथिन हटाओ, पर्यावरण बचाओ' अभियान के तहत लगभग 1,381 कुंटल प्लास्टिक कचरा जुटाया गया है। और इस पूरे प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल राज्य में प्लास्टिक-कोलतार मिश्रित सड़क के निर्माण में किया जाएगा। कचरे की यह मात्रा 138 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए पर्याप्त है।
हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सहयोग से नमूने के तौर पर शिमला के बाहरी हिस्से में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से तीन सड़कों का निर्माण किया है। इन सड़कों के निर्माण में कैरी बैग, प्लास्टिक के कप, चिप्स, पान मसाले के पैकेट, बिस्कुट, चॉकलेट, दूध और अन्य सामानों को पैक करने में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है। प्लास्टिक और डामर के मिश्रण से तैयार की गई इन सड़कों ने अच्छा परिणाम दिया है। पिछले चार महीनों के दौरान इन सड़कों में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं आई है। प्लास्टिक के इस्तेमाल से सड़कों के निर्माण में न केवल लागत कम आ रही है, बल्कि प्लास्टिक की मजबूती के कारण सड़कें टिकाऊ भी हो रही हैं।
प्लास्टिक कचरे से 10 से 15 प्रतिशत कोलतार की बचत होती है और इससे प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण में लगभग 35,000 से 45,000 रुपये की बचत होती है। ज्ञात हो कि हिमाचल प्रदेश ने दो अक्टूबर, 2009 से पॉलीथिन बैग के निर्माण, भंडारण इस्तेमाल और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है।












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