'न तुम हारे न हम हारे' : अमर
सपा से निष्कासित किए जाने की घोषणा किए जाने के चंद घंटों के अंदर ही एक संवाददाता सम्मेलन में अमर ने कहा, "अब मैं अपनी तरह से काम करने को आजाद हूं.....मैं पार्टी में रहूं या ना रहूं लेकिन आज भी मुलायम सिंह का सम्मान करता हूं। आज के बाद अब मैं सपा के बारे में कुछ भी नहीं कहूंगा।"
उन्होंने कहा, "सपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में अंग्रेजी और कम्प्यूटर का विरोध किया था। पार्टी में रहते हुए इसका विरोध करने में मुझे घुटन महसूस हो रही थी। कहा जाता है कि पार्टी का पूंजीवाद हो गया है। इसे समझने में पार्टी को 14 साल लग गए। मुलायम सिंह जब मुख्यमंत्री थे तब उत्तर प्रदेश विकास निगम का गठन किया गया था, जिसके कि अनिल अम्बानी सहित कई प्रमुख उद्योगपति सदस्य थे।"
उन्होंने कहा, "सोमवार को सपा के वरिष्ठ नेता रशीद मसूद ने मुझसे पूछा था कि क्या अभी भी मेरी पार्टी में लौटने की संभावनाएं हैं। इसके जवाब में मैंने साफ-साफ ना कह दिया था। क्योंकि मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए थे कि कल्याण सिंह को साथ लाने के लिए मैं जिम्मेदार हूं और फिर मेरे पास मुलायम की कोई सीडी है, उनसे मैं दुखी था।"
अमर ने कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि मेरे पास मुलायम की कोई सीडी है।"
उन्होंने कहा, "मैंने ने शारीरिक अस्वस्थता के चलते छुट्टी मांगी थी लेकिन इसके बदले में मुझे पार्टी से निकाला गया। मुझ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया जबकि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने उत्तर प्रदेश के बंटवारे की जो बात कही थी, वह मेरा सुझाव था। मैंने क्षत्रिय सम्मेलन किया लेकिन उसमें अन्य और पिछड़ी जातियों के लोग भी थे।"
मुलायम के खिलाफ टिप्पणी न करने की बात करने वाले अमर ने इशारों ही इशारों में अपना संकेत भी दे दिया। उन्होंने कहा, "परिवारवाद, जातिवाद और तानाशाही से पार्टी नहीं चल सकती।"
अमर के स्थान पर पार्टी महासचिव व प्रवक्ता बनाए गए तथा उनके निष्कासन की घोषणा करने वाले मोहन सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव में आर्थिक मदद के लिए वह मेरे पास गिडगिड़ा रहे थे। वह देवरिया में चौथे स्थान पर रहे। अब वह राज्यसभा की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उनकी यह कामना पूरी होती है तो उनको मेरी सद्भावना है।"
उन्होंने कहा, "मैं 14 वर्षो तक पार्टी का प्रवक्ता रहा और मुझे जैसा कहा जाता था वैसा कहता रहा। मोहन सिंह 14 दिनों से प्रवक्ता हैं और उन्हें जैसा निर्देश मिल रहा है वह वैसा बोल रहे हैं।"
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की तारीफो के पुल बांधे जाने से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि देश में दो ही नेता ऐसे हुए जिन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के बाद उसे ठुकरा दिया। एक ज्योति बसु और दूसरी सोनिया गांधी। यह सत्य है।"
मायावती के बारे में सफाई देते हुए अमर सिंह ने कहा, "मैं अब पीड़ित हुआ हूं इसलिए मुझे परपीड़ा समझ में आई।"
भविष्य की राजनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया, "किसी भी राजनीतिक दल या फिर उसके नेता से मेरी इस सिलसिले में कोई बात नहीं हुई है। मैं फिलहाल लोक मोर्चा के माध्यम से अपना काम करता रहूंगा।"
सिंह ने इस संवाददाता सम्मेलन का अंत अपनी चिरपरिचित शैली में यह कहकर किया-"तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय, न तुम हारे न हम हारे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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