157 किताबें लिखने वाले अग्रवाल के जज्बे में कोई कमी नहीं (फोटो सहित)
आगरा, 31 जनवरी (आईएएनएस)। कहते हैं पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती है। इसके लिए मजबूत इरादे की जरूरत होती है। यहां रहने वाले 91 वर्षीय एम.एल.अग्रवाल ऐसे ही मजबूत इरादे वाले शख्स हैं। वह अबतक 157 किताबें लिख चुके हैं और आगे भी ऐसा ही करने का जज्बा रखते हैं।
अग्रवाल वर्ष 1951 से किताबें लिख रहे हैं। गत वर्ष भी उनकी एक किताब प्रकाशित हुई थी। वह अंग्रेजी में लिखते हैं। उनकी लिखी किताबों की हजारों प्रतियां बिक चुकी हैं।
महाविद्यालय के सेवानिवृत प्रधानाचार्य अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा कि उनकी लिखी किताबों से छात्रों को काफी लाभ पहुंचता है। अग्रवाल द्वारा तैयार अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोष का 35 संस्करण प्रकाशित हो चुका है।
अग्रवाल का जन्म हाथरस में हुआ था। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक किया। वर्ष 1979-80 में सेवानिवृत होने के बाद से वह छात्रों के लिए लगातार पुस्तकें तैयार कर रहे हैं।
अग्रवाल ने उत्तराखंड बोर्ड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के स्कूली छात्रों के लिए ढेरों किताबें लिखी हैं। अंग्रेजी व्याकरण की उनकी किताबें छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है।
अग्रवाल की किताब 'इन्सपाइरिंग पोएट्स' उत्तर प्रदेश के हाई स्कूलों में कई वर्षो तक पढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि उनके पास प्रकाशकों की लंबी लाइनें लगी रहती है। वह निश्चित अवधि में किताब लिखकर प्रकाशकों को सौंप देते हैं।
अग्रवाल ने कहा, "मैं जो लिखता हूं उसे मिटाता नहीं हूं। जो लिख देता हूं वही अंतिम होता है। मैं बार-बार संपादित नहीं करता हूं।" वह कलम से ही लिखते हैं। अग्रवाल ने कंप्यूटर के सहारे कभी नहीं लिखा है।
अग्रवाल ने कहा, "शुरुआत में मैं अखबारों में संपादकों के नाम पत्र लिखा करता था। कभी कभार कुछ लेख भी लिखता हूं। मैं हर दिन सुबह दो घंटे अखबार पढ़ता हूं। दिन में दो शिफ्टों में कम से कम चार घंटे पढ़ता- लिखता हूं।"
आगरा स्थित 'वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर' संगठन ने अग्रवाल के बारे में विस्तृत जानकारी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स को भेजा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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