खंडवा में 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होगा बिजली संयंत्र (लीड-1)
इस संयुक्त उद्यम में आरंभ में दोनों कंपनियों की बराबर की हिस्सेदारी रहेगी, इसके बाद इक्विटी को डायल्यूट किया जाएगा ताकि भेल और एमपीपीजीसीएल दोनों के स्वामित्व को 26-26 प्रतिशत तक किया जा सके। इसके अलावा शेष बची 48 प्रतिषत इक्विटी को वित्तीय संस्थान या बैंक तथा अन्य भागीदारों में बांट दिया जाएगा।
संयुक्त उद्यम अनुबंध पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय भारी उद्योग राज्यमंत्री अरुण यादव, प्रदेश के उर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल की उपस्थिति में भेल के प्रबंध निदेशक बी.पी. राव और एमपीपीजीसीएल के कार्यकारी निदेशक ए. एम. संजनानी ने हस्ताक्षर किए। इस संयंत्र में 800-800 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां स्थापित होंगी जिनकी कुल क्षमता 1600 मेगावाट होगी। पहली इकाई 48 माह में पूरी की जाएगी और दूसरी इकाई को 54 माह में पूरा किया जाएगा।
सुपर क्रिटिकल टेक्नालाजी पर आधारित इस संयंत्र में कोयले की कम खपत के साथ उत्सर्जन कम होगा और यह पर्यावरण के अनुकूल होगा। इस परियोजना को क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम) को आधार बनाकर मूर्तरूप दिया जाएगा जो कार्बन के लिए अनुकूल होगा। बताया गया है कि भेल ने अपनी तकनीक का उन्नयन करते हुए सब क्रिटिकल सेट को सुपर क्रिटिकल सेटों में परिवर्तित किया है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि राजनेता निंदा आलोचना का मार्ग छोड़कर जनता के लिए कार्य करें और केंद्र व राज्य सरकार को उर्जा सहित अन्य क्षेत्रों ंमे मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने प्रदेश की उर्जा परियोजनाओं को पर्यावरण का मंजूरी दिए जाने का प्रधानमंत्री से आग्रह किया है।
भारी उद्योग राज्य मंत्री अरुण यादव ने कहा कि इस विद्युत संयंत्र के स्थापित होने से खंडवा विद्युत हब बन जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उर्जा उत्पादन की संभावनाओं को साकार करने में पूरा सहयोग करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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