ओबामा भी साइबर हमले से विचलित
अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के बाद अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने भी कहा है कि बराक ओबामा गूगल पर चीन से हुए साइबर हमले पर चिंतित हैं. उनके हवाले से कहा गया है कि वे चाहते हैं कि चीन पूरे मामले के बारे में सवालों के जवाब दे.
इससे पहले चीन ने इंटरनेट नियंत्रण के मामले पर अमरीका को आड़े हाथों लिया था.
ताज़ा बयानबाज़ी चीन और अमरीका के बीच तनाव का संकेत है.
गूगल ने आरोप लगाया था कि चीन में स्थित हैकरों ने गूगल की सेवाओं को निशाना बनाया था. गूगल ने कहा है कि वह चीन में अपना कामकाज समेटने पर जल्द ही फ़ैसला करेगा.
गूगल के पास चीन की सर्च मार्किट का एक-तिहाई हिस्सा है और अपने प्रतिद्वंद्वी चीन के बैयदू से ख़ासा पीछे है जिसके पास मार्किट का 60 प्रतिशत हिस्सा है.
बीजिंग में बीबीसी संवाददाता डेमियन ग्रेमेटिक्स का कहना है, "गूगल ने चीन को बहुत ही मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. वह कई संवेदनशील मसलों पर अमरीकी निरीक्षण के दायरे में आ गया है. इनमें इंटरनेट सेंसरशिप, प्रतिद्वंद्वियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को चुप कराना, चीन से साइबर हमले और बड़ी अमरीकी कंपनियों के चीन में कारोबार करने की परेशानी शामिल हैं...चीन इन सभी मसलों में बचाव की स्थिति में आ गया है."
चीन ने एतराज़ जताया
चीन ने अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की आलोचना करते हुए कहा है कि जिस तरह के बयान आए हैं उनसे दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं.
हिलेरी क्लिंटन ने चीन से ये भी अपील की थी कि वो गूगल की उन शिकायतों की जाँच कराए, जिसमें कहा गया था कि चीन में ही साइबर हमले की शुरुआत हुई थी.
इस पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मा ज़ाओशू ने कहा कि अमरीका को तथ्यों का सम्मान करना चाहिए और चीन के ख़िलाफ़ आधारहीन आरोप नहीं लगाने चाहिए.
चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा गया, "अमरीका ने इंटरनेट की देखरेख के मामले में चीन की आलोचना की है और ये संकेत दिया है कि चीन इंटरनेट स्वतंत्रता पर रोक लगाता है. लेकिन यह आरोप तथ्यों से परे हैं. इससे दोनों देशों के संबंधों को नुक़सान पहुँच सकता है."












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