मेक्सिको व मध्य अमेरिका में वर्ष 2009 में चरम पर रही गरीबी
मेक्सिको में ईसीएलएसी के प्रमुख ह्यूगो बेटेटा ने संवाददाताओं को बताया कि चरम गरीबी की श्रेणी में उन लोगों को शामिल किया जाता है, जिनकी प्रतिदिन की आमदनी 1.25 डॉलर से कम होती है।
ईसीएलएसी ने इस आशय की घोषणा और अन्य आंकड़ों की घोषणा गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र वर्ल्ड इकोनॉमी सिचुएशन एंड प्रास्पेक्ट्स-2010 की रिपोर्ट के क्षेत्रीय प्रस्तुतिकरण के दौरान की है।
इस अध्ययन में जिन अन्य आंकड़ों की भविष्यवाणी की गई है, उनमें कहा गया है कि चरम गरीबी की अवस्था में रहने वाले लैटिन अमेरिकी लोगों की संख्या इस वर्ष बढ़ कर 40 लाख तक हो जाएगी। इसके साथ ही लैटिन अमेरिकी और कैरिबियन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
बेटेटा ने यह भी कहा है कि पिछले वर्ष पूरे लैटिन अमेरिका में गरीब लोगों की संख्या बढ़ कर 18.90 करोड़ हो गई थी जबकि वर्ष 2008 में गरीब आबादी 18 करोड़ थी।
सरकारी आंकड़े के अनुसार अकेले मेक्सिको में पांच करोड़ से अधिक लोग गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबों की यह आबादी कुल आबादी का 45 प्रतिशत है।
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि लैटिन अमेरिका में पिछले वर्ष बेरोजगारी में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और अनौपचारिक रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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