शरद पवार फिर विवाद में फंसे

राज्यों के पशुपालन और डेयरी विकास मंत्रियों के सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अक्तूबर में दूध की क़ीमतें बढ़ाने का फ़ैसला किया था. उनका कहना था,''जब तक कि (क़ीमतों) फ़ैसला नहीं होता, मुझे नहीं मालूम कि राज्य मांग को कैसे पूरा कर पाते हैं.''
शरद पवार ने कहा,''हम दूध की कमी महसूस कर रहे हैं, ख़ासकर उत्तर भारत में. अक्तूबर में हमने क़ीमतों पर फ़ैसला लिया था. अब फिर दाम को बढ़ाने की मांग की जा रही है.'' कृषि ने कहा कि देश में दूध का जितना सालाना उत्पादन बढ़ना चाहिए, असलियत में उससे काफ़ी कम बढ़ोत्तरी हो रही है. इससे मांग व आपूर्ति के बीच खाई बढ़ती जा रही है. इस अंतर को घटाना सरकार की प्राथमिकता है.
ग़ौरतलब है कि पहले ही निजी दूधियों ने दूध की कीमत 32 रुपए लीटर कर दी है, जबकि मदर डेयरी व अमूल के दूध की कीमत 28 रुपए लिटर है. अक्तूबर में दिल्ली समेत कई राज्यों में दूध के दाम दो रुपए लीटर बढ़े थे. साथ ही अन्य दूध की सहकारी समितियाँ उपलब्धता की कमी का हवाला देते हुए दाम बढ़ाने की मांग कर रही हैं.












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