सिनेमेटोग्राफर वी.के.मूर्ति
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। महान सिनेमेटोग्राफर वी.के.मूर्ति को वर्ष 2008 के दादा साहब फाल्के सम्मान के लिए चुना गया है। उन्हें गुरुदत्त की सभी फिल्मों में सिनेमेटोग्राफी करने के लिए याद किया जाता है।
ऐसा पहली बार हुआ है कि इस पुरस्कार के लिए एक सिनेमेटोग्राफर को चुना गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि मूर्ति ने भारतीय सिनेमा में एक नया आधार रखते हुए आधुनिकता की शुरुआत की थी। आधुनिक और परिष्कृत तकनीकी का इस्तेमाल कर उन्होंने दृश्यों को और कलात्मक बनाया। उन्होंने वर्ष 1959 में भारत की पहली सिनेमास्कोप फिल्म 'कागज के फूल' में सिनेमोटोग्राफीकी थी। वह गुरुदत्त के सभी फिल्मों के सिनेमेटोग्राफर रहे।
मूर्ति ने 'जिद्दी' (1948), 'बाजी' (1951), 'जाल' (1952), 'प्यासा' (1957), और 'चौदहवीं का चांद' (1960) के साथ ही अन्य फिल्मों में भी सिनेमोटोग्राफी की थी।
उनका जन्म सन् 1923 में हुआ था। वह करीब पांच दशक तक मुंबई फिल्म नगरी में काम करने के बाद इन दिनों बेंगलुरू में रह रहे हैं।
मूर्ति को यह सम्मान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील देंगी लेकिन अभी इसकी तारीख तय की जानी है। मूर्ति को 10 लाख रुपये, एक स्वर्ण कमल और शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया जाएगा।
सरकार फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रति वर्ष दादा साहब फाल्के सम्मान प्रदान करती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications