भदेसर के किशन सिंह की मौत भूख से नहीं, बीमारी से हुई
चितौड़गढ़ जिला कलेक्टर स्वयं भी मृतक के घर गए और उनके परिवारजनों से सम्पर्क किया। ऐसा कोई तथ्य सामने नही आया कि स्व.किशन सिंह का परिवार भूख से पीड़ित है। इससे पहले अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन), उपखण्ड अधिकारी निम्बाहेड़ा, जिला रसद अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अन्य ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों द्वारा चम्पाखेड़ी जाकर स्व. किशन सिंह के परिवारजनों से सम्पर्क किया गया।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक किशन सिंह के परिवार का राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉब कार्ड बना हुआ था। पीड़ित परिवार के घर से मात्र तीन सौ मीटर की दूरी पर ग्रेवल रोड का कार्य किशन सिंह की मृत्यु से पहले चल रहा था। मृतक का परिवार बीपीएल परिवार में शामिल नहीं था। इस कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अन्त्योदय योजना, अन्नपूर्णा योजना, राष्ट्रीय मातृत्व योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजनाओं के तहत बीपीएल परिवार को प्रदत्त विशेष सुविधाओं से लाभांवित नहीं हो रहा था।
मृतक किशन सिंह के परिवार के तीन बच्चे ग्राम पंचायत धीरजी का खेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में नियमित रूप से अध्ययनरत है तथा उन्हें नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन के अन्तर्गत लाभान्वित किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता के रूप में 50 किलोग्राम गेहूं उप¶ब्ध करवाया तथा मृतक की पत्नी गंगाकंवर को विधवा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। मृतक के परिजनों के सभी सदस्यों की चिकित्सकीय जांच भी करा दी गई है।
मृतक की पत्नी को सलाह दी गई है कि वह बीपीएल सेंसस-2002 के प्रावधानानुसार उपखण्ड अधिकारी निम्बाहेड़ा के न्यायालय में परिवार को बीपीएल की श्रेणी में सम्मिलित किये जाने के लिए अपील प्रस्तुत करें क्योंकि परिवार के प्रमुख कमाऊ सदस्य की मृत्यु हो चुकी है।
चितौड़गढ़ जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के अनुसार किशन सिंह की मृत्यु भूख से न होकर बीमारी के कारण हुई है और मानवीयता के आधार पर मृतक के परिजनों को प्रशासन की तरफ से नियमानुसार जो भी सहायता सम्भव थी उसे समय पर उपलब्ध कराने में कौताही नहीं बरती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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