आंध्र प्रदेश में उल्लास के साथ मनाया गया संक्रांति पर्व
सुबह से ही शहर और गांव पर्व के रंग में रंग गए थे। तेलुगू लोगों ने रंग-बिरंगी पतंगों, रंगोली, सजे-धजे सांडों व मुर्गो की लड़ाई के साथ इस पर्व को मनाया।
महिलाओं ने तड़के ही घरों के आगे फूलों और गाय के गोबर से रंगोली बनाकर पर्व के आयोजनों की शुरुआत कर दी थी। घरों को आम की पत्तियों और गेंदे के फूलों से सजाया गया था।
इस बार यहां मकर संक्रांति पर पृथक तेलंगाना की मांग का असर दिखा। तेलंगाना में हैदराबाद और नौ अन्य जिले आते हैं।
पृथक तेलंगाना के समर्थन में सभी राजनीतिक दलों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के आह्वान की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप कुछ लोगों ने अपने घरों के सामने रंगोली में 'जय तेलंगाना' लिखा तो कुछ लोगों ने रंगोली में प्रस्तावित राज्य का नक्शा उकेरा।
त्योहार मनाने के लिए हजारों लोग हैदराबाद से अपने-अपने गांव और शहर पहुंचे। अधिकारियों ने त्योहार के अवसर पर हैदराबाद से तटीय आंध्र क्षेत्र के लिए विशेष बसें और रेलगाड़ियां चलाईं।
यह तीन-दिवसीय उत्सव भोगी के साथ शुरू हुआ। इसमें लोगों ने घरों पर बेकार पड़े साजो-समान से सड़कों पर अलाव जलाए।
हैदराबाद में पतंगबाजी के बिना मकर संक्रांति का पर्व अधूरा माना जाता है। बच्चों और बड़ों ने आकाश पर रंग-बिरंगी और सजी-धजी पतंगें उड़ाईं।
आंध्र प्रदेश में कई जगहों पर मुर्गो की लड़ाई के पारंपरिक खेल का आयोजन हुआ। कुछ जगहों पर भेड़ों और सांडों की लड़ाई के खेल भी हुए।
इस अवसर पर फसलों में बैलों के योगदान के लिए उनकी पूजा की गई। महिलाओं ने विशेष व्यंजन 'चक्कारा पोंगल' बनाया। यह नए चावल, गुड़ और दूध से बना व्यंजन होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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