महाकुंभ के लिये तैयार है हरिद्वार

महाकुंभ के लिये तैयार हरिद्वार

शालिनी जोशी
देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

हरिद्वार में मकर संक्रांति से शुरू होने वाले महाकुंभ के लिए तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं. 14 जनवरी से 14 अप्रैल तक चलनेवाले इस मेले में 4 से 5 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है जिसके तहत सुरक्षा के असाधारण इंतज़ाम किए गए हैं. भारत के चार नगरों इलाहाबाद, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से हर चौथे साल कुंभ का मेला लगता है.

पौराणिक आख्यानों के अनुसार समुद्रमंथन के दौरान निकला अमृतकलश 12 स्थानों पर रखा गया था जहां अमृत की बूंदें छलक गइ थीं. इन 12 स्थानों में से 8 ब्रम्हांड में माने जाते हैं और चार धरती पर जहां कुंभ लगता है. हिंदु धर्म में मान्यता है कि इस मेले में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है .

हिंदू विद्वान कहते हैं कि इनमें हरिद्वार के महाकुंभ का विशेष महत्त्व है. पं.विद्याधर भट्ट के अनुसार, "सिर्फ हरिद्वार का कुंभ ही कुंभ राशि में लगता है बाकी जगहों के कुंभ दूसरी राशियों में आयोजित होते हैं. यहां कुंभ राशि के अंदर वृहस्पति होता है और सूर्य के संयोग से अमृततुल्य योग बनाता है".

करोड़ों लोगों की आस्था और भक्ति के इस महासंगम के लिये व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर की गई है. हरिद्वार में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे ये धर्मनगरी छावनी में तब्दील हो चुकी है. चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती है जो लगातार चेकिंग कर रहे हैं और दूर-दूर तक फैले सुरक्षा बलों के कैंप दिखाई पड़ते हैं.

कुंभ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय रौतेला कहते हैं,"पूरे मेले के दौरान करीब 16000 पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात रहेंगे और हर श्रद्धालु के पहचान की जाँच की जाएगी.खुफिया ब्यूरो के लोग पल-पल की ख़बर रखेंगे."

पूरे इलाक़े में रक्षा मंत्रालय की एंटी-माइंस टीम भी तैनात होगी और दो हेलीकॉप्टर लगातार मेले की चौकसी करेंगे. हांलाकि इतने व्यापक सुरक्षा इंतजामों के मद्देनज़र अखाड़े और पुरोहित समाज में काफ़ी रोष है.

गंगा सभा के सदस्य और कुंभ पुरोहित प्रतीक मिश्र कहते हैं,"ये शुभ कार्य का सूचक नहीं है, भय के साये में लोग कैसे स्नान कर पाएंगे. हर की पैड़ी पर ही स्नान का महत्त्व है. लेकिन जो व्यवस्था की गई है उसमें 5 किमी पहले से ही लोगों को रोक दिया जाएगा तो कौन पंहुच पाएगा यहां. ऐसे में तो सिर्फ मंत्री अधिकारी और उनके रिश्तेदार ही आ पाएंगे. बाकी लोगों को तो जगह-जगह ऐसे ही स्नान करके लौट जाना पड़ेगा."

इस मेले के लिए गंगा के घाट-सड़क-पुल और निर्माण कार्यों पर 500 करोड़ का खर्चा आया है. मेला अधिकारी आनंदवर्धन कहते हैं, "इस बार स्थाई निर्माण कार्य किये गए हैं जो करीब सौ साल तक काम आएंगे और इस दौरान गंगा की साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा. इसके लिये 40 किमी लंबी नई पाइप लाइन और गंगा एक्शन प्लान के तहत सीवरेज प्लांट लगाए गए हैं."

मेले के दौरान गंगा का जल अविरल बहता रहे इसके लिये टिहरी बांध से रोजाना गंगा में 4000 क्यूसेक अतिरिक्त जल भी छोड़ा जाएगा. प्रशासन के अपने तर्क और दावे हैं और आस्था के अपने. लेकिन इतना तय है कि इतने सारे इंतजामों से गुज़रने के बाद पुण्य-प्राप्ति के लिये गंगा में डुबकी लगाना आसान नहीं होगा.

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