महा कुंभ की शुरूआत के लिए मानवता का सैलाब उमड़ा
मधुश्री चटर्जी
हरिद्वार, 13 जनवरी (आईएएनएस)। हिंदुओं की पवित्र नगरी हरिद्वार में गुरुवार को महा कुंभ की शुरुआत के अवसर पर पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए अनुमानित 50 लाख लोग इकट्ठे हुए हैं। इस बार यह धार्मिक मेला पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा।
अधिकारियों का कहना है कि 28 अप्रैल तक चलने वाले कुंभ मेले में देश-विदेश से कम से कम छह करोड़ पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के शामिल होने का अनुमान है। यहां पिछली बार 1988 में आयोजित कुंभ मेले में एक करोड़ लोग इकट्ठे हुए थे।
एक सौ तीस किलोमीटर क्षेत्र में फैले मेले की व्यवस्था देख रहे उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारी आलोक शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "कुंभ मेले का आयोजन करना एक शहर के अंदर एक दूसरे शहर को खड़ा करने जैसा है।"
हरिद्वार के आसपास के इलाकों में पहले ही साधुओं और अन्य श्रद्धालुओं के रहने के लिए तंबू लगा दिए गए हैं। पवित्र गंगा उन महत्वपूर्ण स्थानों में से एक जगह है जहां हिंदू श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे।
श्रद्धालुओं के रहने के लिए लगाए गए तंबू ऋषिकेश और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक फैले हैं।
पिछले हफ्ते से ही ऋषिकेश से हरिद्वार तक पवित्र नदी के किनारों पर मंदिरों और धार्मिक रीति-रिवाजों की छटा देखी जा रही है।
मेले के एक अधिकारी राजेश कुमार के मुताबिक पवित्र गंगा नदी में स्नान के लिए 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 12 फरवरी (महाशिवरात्रि), 15 मार्च (सोमवती अमावस्या) और 14 अप्रैल (मेष संक्रांति और बैसाखी) महत्वपूर्ण दिन हैं।
इस साल कुंभ मेले में नागा साधु पर्यावरण के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कोलकाता में हाल ही में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में नागा संप्रदाय प्रमुख सोहम बाबा ने कहा कि हिमालय और पूरे विश्व में फैली हुई झीलें व अन्य जल संचय क्षेत्र गायब हो रहे हैं।
सोहम बाबा ने कहा कि जो साधु ध्यान के लिए हिमालय की ऊंचाइयों पर जाते हैं उन्हें पता है कि स्थिति कितनी खराब है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला विरोध दर्ज कराने का एक अच्छा स्थान है।
उत्तराखंड सरकार ने मेले को 10 जोन और 32 सेक्टरों में बांटा है। मेले की व्यवस्था के लिए मेला परिसर में 34 पुलिस स्टेशन और 36 अग्निशमन स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications