सज्जन कुमार पर कसा सीबीआई का शिकंजा, आरोप पत्र दाखिल (राउंडउप)
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीबीआई ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े दो मामलों में कुमार तथा अन्य के खिलाफ बुधवार को आरोप पत्र दाखिल किए।
सीबीआई ने कुमार व अन्य के खिलाफ तीस हजारी अदालत में मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा के समक्ष दो आरोप पत्र दाखिल किए।
इस आरोप पत्र में कहा गया है कि कुमार ने एक नवम्बर, 1984 में सुल्तानपुरी क्षेत्र में 300 से 400 लोगों की एक भीड़ को सिखों को मारने, उन्हें जलाने तथा उनके घरों को लूटने के लिए उकसाया था।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमारी जांचों में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कुमार ने सुल्तानपुरी के बी-2, ब्लॉक पार्क में इकट्ठे हुए 300-400 लोगों की भीड़ को सिखों को मारने, जलाने और उनके घरों को लूटने के लिए उकसाया था।" कुमार उस वक्त बाहरी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से सांसद थे।
सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक, "जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कुमार ने भड़काऊ भाषण दिए और भीड़ को उकसाया और साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया। इसका नतीजा यह हुआ कि भीड़ ने लाठियों, बल्लमों, केरोसिन तेल और बंदूकों के साथ कालोनी के सी व अन्य ब्लॉकों स्थित गुरुद्वारों पर हमला बोल दिया। इस दौरान कई सिखों को मार गिराया गया। उनकी संपत्तियों को लूटा गया तथा घरों को जला दिया गया।"
कुमार के खिलाफ पहला आरोप पत्र दिल्ली छावनी इलाके में पांच लोगों की हत्या से संबंधित है जबकि दूसरा सुल्तानपुरी क्षेत्र में दंगों के दौरान हुई कई लोगों की हत्याओं से संबंधित है।
सीबीआई ने कुमार तथा अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किए हैं, जिनमें हत्या, दंगे भड़काना और आपराधिक षडयंत्र रचने जैसे मामले शामिल हैं।
आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अदालत ने संबंधित सभी मामलों को कड़कड़डुमा अदालत में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार को हस्तांतरित कर दिया। इस मामले की पहली सुनवाई 18 जनवरी को होगी।
कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "हमारी पार्टी न्यायिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने पर विश्वास नहीं करती।"
उधर, दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे लोगों ने सीबीआई के इस रुख का स्वागत किया है।
दंगा पीड़ितों के लिए संस्था चला रहे बाबूराम दुखिया ने कहा, "यह हमारे लिए राहत की बात है लेकिन यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। हम जो पिछले 25 सालों से कह रहे हैं, वह आज साबित हो गया। हम खुश तभी होंगे जब इन्हें दंडित किया जाएगा।"
दंगा पीड़ितों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे वरिष्ठ वकील एस. एस. फुल्का ने कहा, "ये आरोप पत्र दाखिल होने में एक लंबा अरसा गुजर गया। लेकिन हमें खुशी है कि कुछ न होने से तो बेहतर है जो अभी हुआ। हम उसकी जमानत याचिका का विरोध करेंगे। पीड़ितों के परिजनों को उम्मीद है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा।"
उल्लेखनीय है कि दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंदर खन्ना ने पिछले दिनों 84 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। उनकी अनुमति के बाद ही सीबीआई ने कुमार के खिलाफ ये आरोप पत्र दाखिल किए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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