शब्दों से विचार ग्रहण करने की प्रक्रिया का रहस्य सुलझा!

इस निष्कर्ष से मनोवैज्ञानिक एवं तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ियों को सुलझाने में मदद मिलेगी। कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर कॉग्निटिव ब्रेन इमेजिंग के निदेशक एवं मनोविज्ञान के प्रोफेसर मार्केल जस्ट ने कहा, "हमने इस शोध में दिमागी शब्दकोश की संरचना समझने की कोशिश की है। हमने पता लगाया है कि शब्दों और विचार के बीच सेतु की भूमिका निभाने वाला यह जैविक शब्दकोश किस तरह संगठित है। यह वस्तुओं के आकार या रंगों के मुताबिक समायोजित नहीं है।"

शोधकर्ताओं के अनुसार मूल मानवीय तत्वों से जुड़े तीन कोड या कारक ये हैं कि आप वस्तु (वस्तु को आप पकड़ते कैसे हैं, इस पर जोर कैसे लगाते हैं, इसे मरोड़ते कैसे हैं आदि) के साथ किस तरह पेश आते हैं। ये तीनों कारक दिमाग के तीन से पांच हिस्सों में कोडेड हैं। कंप्यूटर दशमलव पद्धति के जरिए इन तीनों कारकों का पता लगाया गया।

विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इस शोध के तहत भौतिक वस्तुओं को सूचित करने वाले 60 विभिन्न संज्ञाओं यानी नामों के प्रति शोध भागीदारों की दिमागी प्रतिक्रिया का अध्ययन किया गया। इन संज्ञाओं के प्रति सभी भागीदारों की दिमागी प्रतिक्रिया लगभग समान पाई गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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