जलवायु समझौते में सामाजिक न्याय की अनदेखी न हो :अमर्त्य सेन
सेन ने यहां मंगलवार को यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटिकल साइंस में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "ग्लोबल वार्मिग का सबसे ज्यादा असर दुनिया की निर्धनतम आबादी पर पड़ता रहा है, पर इसे लेकर किसी भी समझौते के दौरान इस तबके की समस्या पर गौर नहीं किया जाता। यह सामाजिक न्याय का मामला है और कोई भी समझौता इसकी अनदेखी कर नहीं हो सकता।"
नोबल विजेता अर्थशास्त्री ने जोर देकर कहा कि कुपोषण, महिलाओं के पिछड़ेपन, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, निरक्षरता आदि जैसी समस्याओं के समाधान को उच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे समझौते होने चाहिए। उन्होंने अपनी पुस्तक 'द आइडिया ऑफ जस्टिस' का जिक्र करते हुए कहा बुनियादी मसलों पर मंथन कर हम न्याय की सही अवधारणा विकसित कर सकते हैं। राजनीतिक दलों, मीडिया और नागरिक समाज सभी का यह कर्तव्य है कि वे इस बहस को आगे बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि कोपेनहेगन सम्मेलन की विफलता के बाद जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए सामाजिक न्याय की अवधारणा ही एक मात्र विकल्प है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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