अपना 50वां सूर्य ग्रहण देखने भारत पहुंचे अमेरिकी खगोलशास्त्री
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। पिछले पांच दशकों में एक भी ऐसा बड़ा सूर्य ग्रहण नहीं रहा है जिसे अमेरिकी खगोलशास्त्री जे पैसकॉफ ने न देखा हो। 66 वर्षीय पैसकॉफ सूर्य ग्रहण के अच्छे दृश्य देखने के लिए पूरी दुनिया का भ्रमण करते रहे हैं। अब वह शुक्रवार को होने वाले सूर्य ग्रहण को देखने के लिए अपने कैमरे के साथ भारत में हैं। यह उनका 50वां सूर्य ग्रहण होगा।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स के विलियम्स कॉलेज में खगोलशास्त्र के प्रोफेसर पैसकॉफ ने यहां आईएएनएस से कहा, "जब मुझे पता चला कि सूर्य ग्रहण के दौरान भारत में 'रिंग ऑफ फायर' का सबसे अच्छा दृश्य दिखाई देगा तो मैंने सूर्य ग्रहण देखने के अपने 50वें स्थान के रूप में भारत को चुना।"
उन्होंने कहा कि वह इसके प्रति बहुत उत्साहित हैं और ग्रहण का स्पष्ट नजारा देखने के लिए दक्षिण की यात्रा करेंगे। वह शुक्रवार का सूर्य ग्रहण देखने के लिए बुधवार को कन्याकुमारी पहुंच जाएंगे। भारत में सूर्य ग्रहण सुबह 11 बजे शुरू होगा और दोपहर बाद 3.15 बजे समाप्त होगा। सूर्यग्रहण सबसे पहले कन्याकुमारी में फिर रामेश्वरम और धनुषकोडी में दिखेगा। मिजोरम से होता हुआ यह पूर्वोत्तर में दिखाई देगा।
उन्होंने कहा, "मैंने कन्याकुमारी में ग्रहण देखने का फैसला किया है क्योंकि यह सूर्य ग्रहण के रास्ते के मध्य में आता है और यहां पर 'रिंग ऑफ फायर' अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देगा।"
पिछली बार 22 नवंबर 1965 को भारत में 'रिंग ऑफ फायर' दिखा था और 21 जून 2020 से पहले इसे फिर से नहीं देखा जा सकेगा। हिंद महासागर पर इसकी अधिकतम अवधि 11 मिनट, आठ सेकंड होगी। इस प्रकार यह सहस्त्राब्दी का सबसे लंबा कुंडलाकार सूर्य ग्रहण होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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