फर्जी मुठभेड़ पर 5 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले में वर्ष 2003 में हुई एक फर्जी मुठभेड़ मामले पर फैसला सुनाते हुए जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को 5 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अन्य 9 को भी दोषी करार देते हुए उनके खिलाफ फैसला सुरक्षित रख लिया है। 6 साल पहले हुई इस फर्जी मुठभेड़ में दो युवकों की मौत हुई थी।

सोनभद्र फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार द्विवेदी ने सोमवार को उपनिरीक्षक रामेश्वर राम सहित 4 कांस्टेबलों को आज उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही इन सभी पर 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक जुर्माना भी ठोका है।

अभियोजन पक्ष के वकील विकास शाक्य ने बताया कि 2 सितंबर 2003 को सोनभद्र रेलवे स्टेशन से बीएससी के छात्र प्रभात कुमार श्रीवास्तव व उसके दोस्त रमाशंकर साहू को शातिर बदमाश बताकर जिले के पिपरी थाने के पुलिसकर्मी रनटोला के जंगल में ले गए और वहां फर्जी मुठभेड़ में मार डाला।

मजिस्‍ट्रेट जांच में हुआ खुलासा

शाक्य ने बताया कि बाद में मजिस्ट्रेट जांच में मुठभेड़ संदिग्ध पाई जाने के बाद मामला आपराधिक जांच विभाग की अपराध शाखा (सीबी-सीआईडी) को स्थानांतरित कर दिया गया। सीबीसीआईडी ने जांच के बाद 2006 में 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट बनाई। आरोपी 16 पुलिसकर्मियों में से दो उपनिरीक्षक केपी सिंह और जयनाथ मिश्रा कभी सुनवाई में नहीं आए, जिस पर उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

अदालत में आज 14 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 5 की सुनवाई हुई और 9 के खिलाफ अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। फर्जी मुठभेड़ में मारे गए दोनों युवक झारखंड के गढ़वा जिले के निवासी थे।

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