कल्याण ने बनाई जन क्रांति पार्टी, बेटे को सौंपी कमान (लीड-1)

लखनऊ स्थित आवास में कल्याण ने कहा, "कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राय थी कि किसी भी पार्टी में शामिल होने की जरूरत नहीं है। इसी के अधार पर नई पार्टी का गठन किया गया।" उन्होंने कहा कि नौजवान के हाथों में पार्टी का नेतृत्व सौंपने की कार्यकर्ताओं की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया को नई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

कल्याण ने कहा कि वह खुद संरक्षक की भूमिका में होंगे और इस नाते पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी को मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने के लिए राजवीर के साथ जल्द ही वह प्रदेश के हर जनपद का दौरा करेंगे।

इस मौके पर जन क्रांति पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा, "कार्यकर्ताओं और पिता जी ने जो उत्तरदायित्व दिया है, उसे मैं पूरे तन-मन से पूरा करुं गा। हमारी पार्टी की विचारधारा प्रखर हिंदूवाद और प्रखर राष्ट्रवाद होगी और जो पार्टी की विचारधाराओं से सहमत हैं उनका पार्टी में स्वागत है। हम भारतीय जनशक्ति पार्टी(भाजश) प्रमुख उमा भारती सरीखे दूसरे प्रखर राष्ट्रवादी नेताओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश करेंगे।"

यह पूछे जाने पर कि यही विचारधारा तो भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की है, तो अलग पार्टी बनाने की क्यों जरूरत पड़ी, तो राजवीर ने कहा, "भाजपा में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता, जिस कारण पार्टी ने अपना जनाधार खो दिया। उत्तर प्रदेश में भाजपा मर चुकी है।"

पार्टी की प्राथमिकताओं की जानकारी देते हुए राजवीर ने कहा कि पार्टी की प्राथमिकता गांव के गरीब किसानों का उत्थान, महिलाओं को सम्मान और दबे कुचलों को सामाजिक न्याय दिलाना होगा। उन्होंने कहा कि अगले तीन महीने के अंदर संगठन के निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा।

राजवीर ने कहा कि आगामी 2012 के विधानसभा चुनावों में पार्टी सभी सीटों पर बिना कोई तालमेल किए अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि टिकटों के बंटवारे में 50 फीसदी की हिस्सेदारी युवाओं को दी जाएगी। साथ ही महिलाओं को भी उम्मीदवार बनाया जाएगा।

राम मंदिर के मुद्दे पर राजवीर ने कहा, "राम मंदिर का मुद्दा राजनीति से दूर होना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो लेकिन इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।"

उल्लेखनीय है कि नवंबर 1999 में भाजपा से निष्कासन के बाद कल्याण सिंह ने पांच जनवरी को अपने जन्मदिन पर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के गठन की घोषणा की थी लेकिन वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले उनकी भाजपा में वापसी हुई थी।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर उपेक्षा का आरोप लगाकार उन्होंने जनवरी 2009 में भाजपा से फिर खुद को अलग करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उनकी करीबी समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव से हुई लेकिन पिछले दिनों फिरोजाबाद लोकसभा उपचुनाव में बहू की हार से बौखलाए मुलायम ने कल्याण से किनारा कर लिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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