ग्रामीण स्वास्थ्य विधेयक ने बढ़ाई पश्चिम बंगाल सरकार की मुश्किलें

कोलकाता, 30 दिसम्बर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार दवा के क्षेत्र में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पारित कर चुकी है। यह विधेयक एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ वाम मोर्चा के कुछ सदस्यों ने इस विधेयक की यह कहकर आलोचना की है कि इस विधेयक के बाद ग्रामीण इलाकों की चिकित्सा व्यवस्था नीम-हकीमों पर आश्रित हो जाएगी।

गौरतलब है कि राज्य में एक नया तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए ग्रामीण विधेयक स्वास्थ्य विनियामक प्राधिकरण विधेयक 16 दिसम्बर को विधानसभा में पारित किया गया था।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रमुख नेता सूर्यकान्त मिश्र ने कहा, "इस विधेयक को लागू करने के पीछे सरकार का एकमात्र उद्देश्य यह है कि ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जा सके। एमबीबीएस चिकित्सक प्राय: ग्रामीण इलाकों में जाने और रहने से इंकार कर देते हैं। हम इन डिप्लोमा धारकों को उन ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराने के लिए भेजना चाहते हैं।"

लेकिन, राज्य में सत्तारूढ वाम मोर्चा के कई सहयोगी इसे मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)की मनमानी करार दे रहे हैं। वाम मोर्चा के घटक दल ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) इस विधेयक के बारे में हुई गठबंधन की बैठक में अपनी आशंका जाहिर कर चुके हैं।

वाम मोर्चा की बैठक में इस विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति के पास समीक्षा के लिए भेजे जाने का निर्णय लिया गया था।

फारवर्ड ब्लॉक के शीर्ष नेता नरेन चटर्जी ने आईएएनएस को बताया, " इस विधेयक को माकपा द्वारा एकतरफा प्रस्तुत कर इसे पारित करा दिया गया था। यह वाम मोर्चा के सिद्धांतों के खिलाफ है। माकपा ऐसा नहीं कर सकती, जैसा वह चाहती है। उसे वाम मोर्चा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।"

आरएसपी के नेता मनोज भट्टाचार्य ने भी नरेन चटर्जी की बातों का समर्थन किया।

भाकपा की राज्य सचिव मंजू मजूमदार ने कहा कि वह वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस से यह पूछना चाहती हैं कि यह कैसे हुआ जबकि वाम मोर्चा की बैठक में यह तय किया गया था कि इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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