शनि के सबसे बड़े चांद पर कुहरे की पर्त
पृथ्वी और टाइटन में एक और समानता है। यह समानता सतह पर उपस्थित द्रव से जटिल रूप से जुड़ी हुई है। यह द्रव कुहरे के रूप में है।
कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैल्टेक) के खगोल विज्ञानी माइक ब्राउन के अनुसार कुहरे की उपस्थिति सतह और वायुमण्डल के बीच अवयव के आदान-प्रदान का तथा एक सक्रिय जल चक्र का पहला सबूत है। पहले पृथ्वी पर ही इसकी उपस्थिति के बारे में जानकारी थी।
ब्राउन सबूतों का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि टाइटन का दक्षिणी ध्रुव मीथेन के कचरे के साथ हर जगह थोड़ा-बहुत उपस्थित है, जो कुहरे की छिटपुट परतों को तैयार करता है। तकनीकी तौर पर कुहरा बादल ही है, लेकिन वह सतह को स्पर्श करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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