मुख्यधारा के नेताओं ने कश्मीर में सैन्य कटौती का स्वागत किया
एंटनी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा था कि पिछले एक वर्ष के दौरान जम्मू एवं कश्मीर से 30,000 सैनिकों को वापस बुलाया जा चुका है। लेकिन उन्होंने कहा कि आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पॉवर एक्ट (एएफएसपीए) समाप्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि सुरक्षा हालात के मद्देनजर इसकी अभी भी जरूरत है।
राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री अली मुहम्मद सागर ने सैनिकों की कटौती के बारे में की गई घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि यह कदम मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के रुख के अनुसार है।
सागर ने कहा, "मुख्यमंत्री सैनिकों की कटौती के लिए प्रयासरत रहे हैं और यह उनके प्रयासों का ही नतीजा है।"
सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) की सरकार में मंत्री सागर ने कहा कि हालात सुधरने के साथ ही और सैनिकों की कटौती की जाएगी।
विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा कि सैनिकों की कटौती की संख्या नाम मात्र की नहीं होनी चाहिए।
अख्तर ने आईएएनएस को यहां बताया, "सैन्य कटौती का दिखावा नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा नहीं कि एक बटालियन को हटा कर दूसरी बटालियन को तैनात कर दिया। इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति तब होगी, जब एएफएसपीए को रद्द कर दिया जाए, जिसके लिए रक्षा मंत्री ने फिलहाल इंकार कर दिया है।"
हुर्रियत के उदारवादी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा, "यदि कश्मीर से 30,000 सैनिकों को वापस बुला लिया गया है, तो यह स्थिति स्थानीय लोगों को दिखाई देनी चाहिए।"
मीरवाइज ने संवाददाताओं को बताया, "रक्षा मंत्री को हमें हर हाल में बताना चाहिए कि सैनिकों की यह कटौती कब और कहां से की गई है।"
आजादी समर्थक जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) ने भी सैन्य कटौती की इस घोषणा को लेकर असंतोष व्यक्त किया है। जेकेएलएफ के उपाध्यक्ष बशीर अहमद भट ने कहा कि यह कटौती कहां से की गई है? लोगों को तो कहीं कटौती दिखाई नहीं दे रही।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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