बलूचिस्तान पर भड़के पाक उच्चायुक्त, कहा 'बहुत हो गया'
मलिक की असहजता पाकिस्तान से आए एक और वक्ता ने यह कहकर बढ़ा दी कि सुरक्षा की लिहाज से अब इस्लामाबाद और काबुल में कोई फर्क नहीं रह गया है।
यह दृश्य दिवंगत बलूच नेता मीर गौस बक्श बिजेंजो की पुस्तक 'इन सर्च ऑफ सॉल्यूसंस' के लोकार्पण के मौके पर देखने को मिला। लोकार्पण समारोह नीति एवं योजना समूह (पीपीजी) द्वारा आयोजित किया गया था। दोनों वक्ताओं पर भड़के मलिक ने कहा, "यह बहुत हो गया।"
इस अवसर पर पीपीजी के अध्यक्ष के.टी.एस. तुलसी ने बलूच इतिहास के कुछ घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को आड़े-हाथों लिया।
तुलसी ने कहा, "पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को जबरन अपने साथ किया। परंतु बलूच लोगों की एक आजाद मुल्क की आकांक्षाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।"
उनकी इस टिप्पणी के बाद 'इडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर' के सभागार में माहौल थोड़ा गरम हो गया। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने माहौल को थोड़ा नरम बनाने की कोशिश की।
इसके बाद दिवंगत बलूच नेता मीर गौस बक्श बिजेंजो के पुत्र और सीनेटर मीर हसन बिजेंजो ने कहा, "मजहबी दहशतगर्दी का उबाल इस पूरे क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर रहा है।"
उन्होंने कहा, "इस्लामाबाद को देखिए। आज वह एक पंचसितारा जेल है। जिन बंदूकों को काबुल में प्रशिक्षित किया गया था अब वे इस्लमाबाद की ओर मुड़ चुकी हैं। इस्लामाबाद और काबुल में आज कोई फर्क नहीं है।"
इस पर मलिक ने कहा, " मैं तुलसी साहब और सीनेटर बिंजेजो साहब से इत्तेफाक नहीं रखता। माफी चाहता हूं, तुलसी साहब, यह शोध की कमी है। दोनों शहरों (इस्लामाबाद और काबुल) की तुलना नहीं की जा सकती। वह नौबत नहीं आई है और ऊपर वाला करे कि आए भी नहीं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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