आंध्र में राजनीतिक गतिरोध जारी, केंद्र ने की शांति स्थापित करने की कोशिश (राउंडअप)
इसी बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को तेलंगाना के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश में शांति स्थापित करने की कोशिश की है। सरकार ने कहा है कि जब तक विधानसभा में अलग राज्य के लिए प्रस्ताव पारित नहीं हो जाता, तब तक इस मुद्दे पर कोई भी आगे का कदम नहीं उठाया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आंध्र प्रदेश के पार्टी सांसदों से तेलंगाना राज्य के प्रस्तावित गठन पर सहयोग करने को कहा है। इसी बीच कांग्रेस प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि तेलंगाना राज्य के गठन के मुद्दे पर पार्टी में मतभेद हैं।
पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी रहे। इस बीच मुख्यमंत्री के.रोसैया और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने गतिरोध दूर करने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।
रोसैया सरकार के लिए राहत की बात यह रही है कि आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के मंत्रियों ने सोमवार को फैसला किया कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। नगरीय प्रशासन मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया कि मुख्यमंत्री ने दोनों क्षेत्रों के सभी 20 मंत्रियों को इस बात से अवगत करा दिया है कि वह उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं करेंगे। इन मंत्रियों ने रविवार को एक बैठक की थी और मुख्यमंत्री के अनुरोध पर वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को सहमत हुए थे।
विधानसभा अघ्यक्ष किरणकुमार रेड्डी द्वारा सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए जाने के बाद तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों और मंत्रियों ने अपनी भावी रणनीति तय करने के लिए बैठकें शुरू कर दी हैं।
ज्ञात हो कि पृथक तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्णय के विरोधस्वरूप 138 विधायकों ने पिछले तीन दिनों के दौरान अपने इस्तीफे विधानसभा अघ्यक्ष को सौंप दिए हैं। इनमें से 80 विधायक कांग्रेस के हैं।
इसी बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को तेलंगाना के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश में शांति स्थापित करने की कोशिश की है। सरकार ने कहा है कि जब तक विधानसभा में अलग राज्य के लिए प्रस्ताव पारित नहीं हो जाता, तब तक इस मुद्दे पर कोई भी आगे का कदम नहीं उठाया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश की स्थिति पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चर्चा की और राज्य के मुख्यमंत्री के.रोसैया को सलाह दी कि उन्हें स्थिति को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्य के आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के कांग्रेस सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से कहा कि तेलंगाना के मुद्दे पर लोकसभा में तब तक चर्चा नहीं होगी, जब तक कि राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित नहीं हो जाता।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आंध्र प्रदेश से सांसद के.एस.राव ने संवाददाताओं को बताया, "मुखर्जी ने हमें भरोसा दिलाया है कि पहले राज्य विधानसभा से प्रस्ताव आना है। तब तक लोकसभा में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी।"
कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि विधानसभा के अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो जाने से राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल के ठंडा होने में मदद मिलेगी।
उधर, राज्य के प्रस्तावित विभाजन के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे विजयवाड़ा से कांग्रेस सांसद एल. राजगोपाल को सोमवार को हैदराबाद हवाई अड्डे पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
शहर के बाहरी इलाके शम्साबाद में स्थित राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजगोपाल के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी का विरोध करने की कोशिश की, जिसके कारण वहां तनाव पैदा हो गया। इस बीच राजगोपाल के कुछ समर्थकों को भी हिरासत में ले लिया गया। राजगोपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया।
राजगोपाल हाथ में तिरंगा झंडा लिए हुए थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहाड़ी शरीफ पुलिस थाने ले जाया गया। वहां उनके समर्थक गिरफ्तारी के विरोध में धरने पर बैठ गए।
ज्ञात हो कि राजगोपाल एक बड़े उद्योगपति हैं और उनके लेंको समूह का हैदराबाद से काफी व्यापारिक हित जुड़ा हुआ है। इस कारण वह राजधानी हैदराबाद को पृथक तेलंगाना राज्य को देने के फैसले के विरोध में हैं।
राजगोपाल ने पूर्व में घोषणा की थी कि वह राज्य विधानसभा के सामने अनशन पर बैठेंगे, जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), छात्र संगठनों और तेलंगाना इलाके के कांग्रेस नेताओं ने राजगोपाल के अनशन को रोकने की चेतावनी दे रखी थी।
राजगोपाल ने पुलिस थाने में संवाददाताओं से कहा, "मुझे नहीं पता कि पुलिस ने मुझे क्यों रोका। मैं तो मुख्यमंत्री और विधायकों से मिलने जा रहा था।"
पुलिस ने कहा कि अनशन की कोई अनुमति नहीं दी गई है। राजगोपाल और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों सहित भारी मात्रा में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था।
टीआरएस ने राजगोपाल पर शहर में उपद्रव फैलाने के लिए विजयवाड़ा से भाड़े पर असामाजिक तत्वों को हैदराबाद लाने का आरोप लगाया था। इसके बाद शहर में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने रविवार रात को ही शहर के कई होटलों पर छापा मारकर सांसद के कई समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था।
राजगोपाल ने बाद में मुख्यमंत्री के.रोसैया से उनके कैंप कार्यालय में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें अनशन पर बैठ कर मुद्दे को पेचीदा नहीं बनाना चाहिए।
रोसैया से मुलाकात के बाद राजगोपाल ने कहा कि वह आंध्र प्रदेश को विभाजित नहीं होने देंगे, क्योंकि इससे राज्य कमजोर हो जाएगा और केंद्र में मोल-तोल की इसकी क्षमता प्रभावित होगी।
एकीकृत आंध्र प्रदेश समर्थक आंदोलन के मद्देनजर विजयवाड़ा और अन्य स्थानों पर पुलिस को सतर्क कर दिया गया है।
उधर, कांग्रेस के ही एक अन्य सांसद एम.जगन्नाथ ने बताया है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आंध्र प्रदेश के पार्टी के सांसदों से तेलंगाना राज्य के प्रस्तावित गठन पर सहयोग करने को कहा है क्योंकि यह फैसला देशहित में लिया गया है।
सोनिया ने बीते सप्ताह आंध्र के पार्टी सांसदों की बैठक में यह बात कही थी। तेंलगाना क्षेत्र के नगरकूरनूल संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधि जगन्नाथ ने सोमवार को कहा, "मैडम (सोनिया) ने हमसे कहा कि हम अलग तेलंगाना के गठन में पार्टी और सरकार का सहयोग करें।"
जगन्नाथ ने आईएएनएस से कहा, "उन्होंने हमसे कहा कि यह फैसला देश हित में लिया गया है और इस मामले पर हमें सहयोग करना पड़ेगा।"
इसी बीच कांग्रेस ने सोमवार को स्वीकार किया है किया तेलंगाना राज्य के गठन के मुद्दे पर पार्टी में मतभेद हैं।
पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद ने यह भी स्वीकार किया कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के.चंद्रशेखर राव के आमरण अनशन के कारण नए राज्य के गठन की प्रक्रिया आरंभ करने की घोषणा भी जल्दबाजी में की गई।
अहमद ने आईएएनएस से कहा, "यह सही है कि इस पर कोई आम सहमति नहीं है। तेलंगाना के गठन पर पार्टी में दो मत हैं। रायलसीमा और तटीय आंध्र के नेता राज्य का विभाजन नहीं चाहते।"
उन्होंने कहा कि आगे की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब आंध्र प्रदेश की विधानसभा इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित करेगी। केंद्र सरकार उस प्रस्ताव का इंतजार करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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