फिल्मों के जरिए ईरान को नई राजनीतिक आवाज मिली
अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'वुमेन विदआउट मैन' के लिए इस साल विंसी फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित सिल्वर पुरस्कार पा चुकीं निशात अपने देश की राजनीति की बड़ी आलोचक बन गई हैं।
उनकी फिल्म 1953 की ईरान की उन राजनीतिक स्थितियों को प्रदर्शित करती है, जिन्हें ब्रिटेन और अमेरिका ने अपने फायदे के लिए सृजित किया था और जिनकी वजह से ईरान की लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकार का स्थान राजशाही ने ले लिया था।
शहरमुश पर्सीपुर के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म पर ईरान में प्रतिबंध लगाया दिय गया है।
ईरान के कई अन्य फिल्मकारों ने भी वहां की राजनीतिक स्थिति पर फिल्में बनाई हैं। इन फिल्मों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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