आसान नहीं है हेडली का प्रत्यर्पण
शिकागो, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। मुंबई हमलों के आरोपी डेविड कोलमैन हेडली की बुधवार को अदालत में पेशी इस कानूनी मामले की प्रक्रियागत शुरुआत भर कही जा सकती है, पर अमेरिकी जिला न्यायाधीश हैरी डी. लीनेनवेबर के समक्ष उसकी संक्षिप्त पेशी से यह संकेत तो मिल ही गया कि हेडली के प्रत्यर्पण में कामयाबी हासिल करना भारत के लिए कठिन है।
अमेरिकी न्याय विभाग या अमेरिकी एटर्नी कार्यालय में से किसी भी महकमे के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बोलने को राजी नहीं दिखे। हेडली को भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा या नहीं, यह सवाल पूछे जाने पर अधिकारी खामोश हो जाते हैं। यूं तो यह मामला प्रत्यर्पण के चरण से अभी काफी दूर है, अभियोजन पक्ष, बचाव पक्ष और संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) भारत की ओर से संभावित प्रत्यर्पण निवेदन से निपटने के विकल्पों पर मंथन में जुटे हैं।
हेडली एवं उसके साथी तहव्वुर हसन राणा का मामला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं राष्ट्रपति बराक ओबामा की बातचीत के एजेंडे में भी शामिल हुआ था। मुंबई कांड की साजिश में हेडली की संलिप्तता के आधार पर उसके खिलाफ आरोप तय किए जाने से प्रत्यर्पण को लेकर भारत की दलील मजबूत हुई है, पर अमेरिका का रुख इस पर स्पष्ट नहीं है। ह्वाइट हाउस के प्रेस सचिव रॉबर्ट गिब्स ने इस मसले पर कहा, "निश्चित तौर पर मैं यह कहना चाहता हूं कि हम अमेरिकी लोगों की रक्षा करेंगे। राष्ट्रपति भी ऐसा ही कहते रहे हैं। आज का दिन इस मामले में महत्वपूर्ण है।"
अभी तक एफबीआई ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि भारत को हेडली से पूछताछ की अनुमति दी जाएगी या नहीं, प्रत्यर्पण की बात तो अभी दूर है। हेडली के गलती स्वीकार नहीं करने से अमेरिकी अधिकारियों पर उसे सारे सबूतों के आधार पर दोषी सिद्ध करने की जिम्मेवारी है। यह लंबी प्रक्रिया है।
इधर, खबर आई है कि हेडली अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है। इसका मतलब यह लगाया जा रहा है कि यह सब उसे मौत की सजा होने से बचाने की पृष्ठभूमि है। जाने-माने खोजी पत्रकार गेराल्ड पोजनर ने यह रिपोर्ट छापकर अमेरिकी सरकार की फजीहत बढ़ा दी है कि हेडली दरअसल ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (डीईए) नामक सरकारी निकाय का भेदिया था जो बाद में दगाबाज निकल गया। इस पर अभी तक किसी भी अधिकारी ने टिप्पणी नहीं की है। अगर यह सही है तो हेडली का प्रत्यर्पण और जटिल हो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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