हथियार डालने के बाद ही आतंकियों से बातचीत होगी : चिदंबरम (लीड-1)
राज्यसभा में यह मुद्दा दो अलग-अलग प्रश्नों के जरिए उठाया गया और केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने दोनों प्रश्नों का जवाब एक ही सुर में दिया।
चिदंबरम ने पूर्वोत्तर के आतंकियों के बारे में कहा, "हमारा रुख स्पष्ट है। हथियार डालो, संप्रभुता की मांग छोड़ो, तभी बातचीत हो सकती है। मेरी पूर्वोत्तर के सभी आतंकी गुटों से यही अपील है। संप्रभुता की मांग छोड़ दीजिए और हथियार डाल दीजिए। इससे बातचीत का रास्ता खुलेगा।"
सदन ने जब उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने पिछले सप्ताह उम्मीद जाहिर की थी कि युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) सरकार के साथ बातचीत के प्रस्ताव संबंधी एक राजनीतिक बयान देगा। इस पर चिदंबरम ने कहा, "इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। यदि उनकी तरफ से कोई प्रस्ताव आता है तो हम उनके साथ बातचीत करेंगे।"
इस पर असम गण परिषद (अगप) के कुमार दीपक दास ने कहा कि सरकार नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन) के इसाक मुइवा धड़े के साथ बातचीत कर रही है, जबकि उसने संप्रभुता की मांग नहीं छोड़ी है।
इस पर चिदंबरम ने कहा, "नागालैंड में युद्धविराम लागू है। इससे वहां हिंसा में कमी आई है। हम एनएससीएन के दोनों धड़ों के साथ संपर्क में हैं। फिलहाल मैं ऐसी स्थिति में हूं कि इस बारे में और कुछ नहीं कह सकता। मुझे भरोसा है कि दोनों समूह बातचीत के लिए राजी हो जाएंगे।"
चिदंबरम से जब यह पूछा गया कि उल्फा प्रमुख अरविंद राजखोवा ने आत्मसमर्पण किया था या उसे गिरफ्तार किया गया था, इस पर उन्होंने कहा, "बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) ने तीन लोगों को मेघालय-बांग्लादेश सीमा पर पकड़ा। तीनों के बारे में जब यह पता चला कि वे असम के मामलों में संलिप्त हैं, तो असम पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एस.एस.अहलूवालिया ने नाराजगी भरे लहजे में पूछा कि सरकार हथकड़ी में राजखोवा से बातचीत की उम्मीद कैसे कर सकती है? इस पर चिदंबरम ने कहा, "यदि बातचीत का प्रस्ताव आता है तो उसे सम्मानजनक तरीके से आयोजित किया जाएगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीबीएफ) के किसी नेता को गिरफ्तार किया गया है, और क्या सरकार इस संगठन के साथ बातचीत करेगी, जो कि अलग बोडोलैंड की मांग कर रहा है, इस पर चिदंबरम ने कहा, "एक मध्यस्थ के जरिए बातचीत समर्थक धड़े के साथ बातचीत जारी है।"
नक्सली हिंसा पर काबू पाने के उपायों के बारे में पूछे जाने पर भी चिदंबरम ने एक जैसा ही जवाब दिया। चिदंबरम ने कहा, "अगर नक्सली हिंसा छोड़ दें तो उनके साथ किसी भी मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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