जलवायु परिवर्तन को लेकर आम आदमी चिंतित

जलवायु परिवर्तन को लेकर आम आदमी चिंतित

बीबीसी और ग्लोबल स्कैन के एक सर्वेक्षण में अनेक देशों के ज़्यादातर लोगों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक बहुत ही गंभीर समस्या है और इस पर सरकारों को गंभीरता से काम करना चाहिए.

सर्वेक्षण में भारत समेत 23 देशों के 24 हज़ार लोगों के इस बारे में विचार लिए गए और इनमें से क़रीब एक तिहाई लोगों ने जलवायु परिवर्तन को बहुत ही गंभीर समस्या बताया.

सर्वेक्षण के मुताबिक सिर्फ़ छह प्रतिशत लोग ऐसे थे जिनका मानना है कि उनके देश की सरकारों को डेनमार्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में किसी समझौते का विरोध करना चाहिए.

ग्लोबल स्कैन के प्रमुख डग मिलर ने इस सर्वेक्षण के बारे में कहा, '' सर्वेक्षण से पता चलता है कि लोग चाहते हैं कि दुनिया भर में छाई मंदी के बावजूद जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कारगर क़दम उठाए जाएं.''

हालांकि कार्बन डाइ ऑक्साइड के दो सबसे उत्सर्जक देशों यानी चीन और अमरीका में सर्वेक्षण बेहद चौंकाने वाले थे.

जहां चीन में क़रीब 89 प्रतिशत लोग जलवायु परिवर्तन से निपटने में सरकार के अतिरिक्त निवेश करने के पक्ष में थे, वहीं अमरीका में ये प्रतिशत सिर्फ 52 था.

चीन में ज़्यादातर लोगों का मानना था कि सरकार को इस दिशा में भरपूर निवेश करना चाहिए भले ही ये अर्थव्यवस्था को कुछ नुक़सान पहुंचाए.

यूरोप के अनेक बड़े देशों के लोग चाहते हैं कि उनकी सरकारें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मज़बूत नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं.

भारत में स्थिति

भारत के संदर्भ में इस मामले में युवाओं में ज़्यादा उत्साह देखा गया है.

जहां 18-24 साल के 52 प्रतिशत युवा जलवायु परिवर्तन को गंभीर समस्या मानते हैं वहीं 55-64 साल के सिर्फ़ 35 प्रतिशत लोग ही ऐसा मानते हैं.

जबकि 65 साल के ऊपर के लोगों में ये और भी कम यानी सिर्फ़ 33 प्रतिशत है.

अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा कर भी जलवायु परिवर्तन के लिए प्रयास करने के समर्थन में सबसे ज़्यादा 63 प्रतिशत लोग 65 साल के ऊपर की उम्र के हैं जबकि युवाओं में ये प्रतिशत कम है.

सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में कम शिक्षित लोग शायद मानते होंगे कि जलवायु परिवर्तन बहुत गंभीर समस्या नहीं है. कम शिक्षित लोगों में जिनसे बात हुई उनमें से 44 प्रतिशत ने इसे बहुत गंभीर समस्या बताया जबकि 25 फ़ीसदी कोई ज़वाब देने की स्थिति में नहीं थे.

वहीं उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों में इस वैश्विक चुनौती के प्रति चिंता स्पष्ट दिखी. 53 फ़ीसदी ने कहा कि मौसम परिवर्तन गंभीर चुनौती है. इस श्रेणी में तीन प्रतिशत लोग कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे.

शिक्षा के आधार पर विचारों में अंतर अन्य देशों की तरह भारत में भी पाया गया लेकिन यहां कम और ज़्यादा पढ़े लिखे लोगों के बीच सोच का फ़र्क ज़्यादा है.

इस मुद्दे पर भारत में क्षेत्रीय आधार पर भी विचारों में अंतर दिखा. जहां पूर्वी भारत के 59 फ़ीसदी और उत्तर भारत के 56 फ़ीसदी लोगों ने माना कि जलवायु परिवर्तन बहुत गंभीर समस्या है, वहीं दक्षिण भारत में ऐसा मानने वाले सिर्फ़ 28 फ़ीसदी लोग थे.

कुल मिलाकर इस सर्वेक्षण के परिणाम यही दिखाते हैं कि कोपेनहेगेन सम्मेलन में कोई फ़ैसला लेने के लिए सरकारों को पर्याप्त जन समर्थन मिल रहा है.

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