चरित्र हनन के लिए इस्तेमाल की गई लिब्रहान रिपोर्ट : भाजपा (लीड-1)

रिपोर्ट पर लोकसभा में आयोजित चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को छद्म उदारवादी कह कर राजनीतिक टिप्पणी की है।

राजनाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा, "अटलजी, आडवाणीजी और जोशीजी को छद्म उदारवादी कहा गया। यह रिपोर्ट चरित्र हनन का एक राजनीतिक दस्तावेज है। आयोग कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं कर सकता। यह खेदजनक है।"

सिंह ने कहा कि छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे का गिरना जनता के आक्रोश का परिणाम था। यह ऐसा आक्रोश था, जिसे रोका नहीं जा सकता था।

राजनाथ सिंह ने कहा, "जनता द्वारा की गई यह एक स्वस्फूर्त कार्रवाई थी।"

जब सिह ने 17वीं और 18वीं शताब्दी के मौलानाओं द्वारा लिखित दस्तावेजों और पश्चिमी इतिहासकारों द्वारा लिखी पुस्तकों का जिक्र करना शुरू किया, जिनमें कहा गया है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद 1528 में राम मंदिर को गिरा कर बनाई गई थी, तो गृह मंत्री पी.चिदंबरम को हस्तक्षेप करना पड़ा और उसके बाद सदन में व्यवधान पैदा हो गया।

चिदंबरम ने कहा, "हम यहां मुकदमे की सुनवाई के लिए नहीं हैं। वह न्यायालय के अधीन है।"

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने गृह मंत्री की बात से सहमति जताते हुए कहा कि यदि मामला न्यायालय के अधीन है तो हम उस पर चर्चा नहीं कर सकते।

राजनाथ सिंह ने कहा कि रिपोर्ट में ढांचा गिराने के लिए षडयंत्र की बात कही गई है लेकिन पुलिस की गोलियों का शिकार हुए कारसेवकों का जिक्र नहीं है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि जब बाबरी मस्जिद गिराई गई तो उस वक्त कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल कारसेवकों में शामिल थे। जगदंबिका पाल ने हालांकि इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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