गीता के उर्दू अनुवाद के मिशन में जुटा है एक आस्थावान मुस्लिम
लखनऊ, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के इस आस्थावान मुस्लिम ने पवित्र हिंदू धर्म ग्रंथ गीता का उर्दू में अनुवाद करने का सपना वर्षों पहले देखा था और आज यह उनका मिशन बन चुका है। सांप्रदायिक सद्भावना की अलख जगाने का जज्बा रखने वाला यह शख्स इस ग्रंथ का गीतात्मक संस्करण तैयार कर रहा है।
यूं तो अभी तक उन्हें 40 श्लोकों का ही अनुवाद करने में सफलता मिली है, पर वे इस मिशन में बड़ी कामयाबी हासिल करना चाहते हैं। लखनऊ से करीब 200 किलोमीटर दूर अंबेडकर नगर जिले के रहने वाले ए.जलालपुरी पिछले पांच वर्षों से गीता का अनुवाद करने में लगे हैंे। गीता को इस तरह अनूदित किया जा रहा है कि लोग उसे किसी गीत की तरह पढ़ सकें।
उन्होंने फोन पर आईएएनएस से बातचीत में कहा, "गीता का उर्दू में अनुवाद करना कठिन काम नहीं है, लेकिन पूरे ग्रंथ को गीतात्मक रूप देना आसान काम नहीं है। मेरे लिए यह वाकई बड़ी चुनौती है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि इस मिशन में मैं सफल रहूंगा। मैं उस गौरवशाली दिन का इंतजार कर रहा हूं जब इस ग्रंथ का संपूर्ण उर्दू अनुवाद पूरा होगा।"
अंबेडकर नगर में नरेंद्र देव इंटर कालेज के उप प्रधानाचार्य जलालपुरी का मानना है कि ऐसी पहल से ही समाज में धार्मिक सद्भाव कायम होगा। उन्हें उम्मीद है कि कुछ ही महीनों में अनुवाद का काम पूरा हो सकता है, बशर्ते कि वह पूरा समय इसी मिशन पर दें।
वह कहते हैं, "कोई व्यक्ति मुझसे यह पूछ सकता है कि अगर पांच साल में 40 श्लोकों का ही अनुवाद हुआ है तो पूरा ग्रंथ कुछ महीनों में कैसे पूरा हो सकता है? मेरा जवाब यह है कि सरकारी शिक्षक होने के कारण मुझे पूरा वक्त नहीं मिल पाता। अगर मैं कुछ महीने इसी कार्य पर ध्यान कें द्रित करूं तो यह काम पूरा हो सकता है।"
वह अंग्रेजी के शिक्षक हैं। उनके दिमाग में यह योजना तब कौंधी थी जब उन्होंने 1979 में उर्दू में पीएचडी कोर्स में दाखिला लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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