नक्सलियों के कारण छत्तीसगढ़ में निवेश को खतरा

करीब 40,000 वर्ग किलोमीटर में फैले बस्तर इलाके में देश का बेहतरीन गुणवत्ता वाला 20 प्रतिशत लौह अयस्क है। क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (भाकपा-माओवादी) की मजबूत पकड़ के कारण उद्योगपति इलाके में निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं।

मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सुराना ने कहा कि जिन निवेशकों ने क्षेत्र में संयंत्र स्थापित करने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे वे भी नक्सलियों के दखल के कारण परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रहे।

इस एसोसिएशन में मध्य भारत में स्थित 175 स्टील इकाइयां शामिल हैं।

टाटा स्टील और एस्सार स्टील ने जून 2005 में राज्य सरकार के साथ 55 लाख टन और 32 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के संयंत्रों की स्थापना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

संयंत्र के लिए भूमि अधिग्रहण से विस्थापित लोगों के समर्थन में नक्सलियों के आगे आने से दोनों परियोजनाओं पर काम रुका है।

आतंकवाद का सबसे खराब प्रभाव देश की सबसे अधिक लौह अयस्क उत्पादक और निर्यातक कंपनी सार्वजनिक क्षेत्र की नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एनएमडीसी) पर पड़ा। कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार अगले पांच वर्षो में नक्सलियों के कारण बस्तर में लौह अयस्क खनन बंद करना पड़ सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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