भारत-रूस के बीच होगा महत्वपूर्ण परमाणु समझौता (लीड-4)
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तीन दिवसीय दौरे पर मास्को पहुंच गए हैं। उम्मीद है कि यह दौरा उभर रही अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को एक दूसरे स्तर पर ले जाएगा।
प्रधानमंत्री के प्रस्थान के पहले नई दिल्ली में एक अधिकारी ने कहा था, "असैन्य परमाणु सहयोग समझौते का विस्तार अति प्रगतिशील है। यह एक पथ प्रदर्शक और बेजोड़ समझौता है।"
प्रधानमंत्री के साथ मास्को गए अधिकारियों ने कहा है कि भारत के लिए परमाणु पुनशरेधन अधिकार पर इस समझौते में एक प्रगतिशील भाषा दर्ज है।
एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने मास्को में कहा, "इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद यदि भविष्य में कभी द्विपक्षीय सहयोग टूट भी गया तो भी परमाणु इर्ंधन की आपूर्ति नहीं रुकेगी।"
प्रधानमंत्री रूसी राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव के आमंत्रण पर भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने मास्को पहुंचे हैं। वह रूसी प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे।
परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर अंतर सरकारी समग्र समझौता दोनों देशों के बीच वर्तमान असैन्य परमाणु सहयोग के विस्तार के लिए एक व्यापक खाका मुहैया कराएगा। पिछले वर्ष दोनों पक्षों ने तमिलनाडु के कुदनकुलम में रूस द्वारा निर्मित किए जाने वाले चार अतिरिक्त रिएक्टरों के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच पिछले वर्ष हुए 123 असैन्य परमाणु सहयोग समझौते से बेहतर होगा, क्योंकि इसमें भारत को इस्तेमाल ईंधन के पुनशरेधन का भी अधिकार प्राप्त होगा और संवेदनशील संवर्धन और पुनशरेधन प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण भी किया जाएगा।
हाल में भारत ने रूस द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले रिएक्टरों के लिए पश्चिम बंगाल के हरिपुर में एक और स्थान के आवंटन की घोषणा की थी।
असैन्य परमाणु सहयोग के अलावा दोनों देशों के नेताओं के बीच चर्चा में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की विस्फोटक स्थिति के बारे में भी चर्चा होगी।
मास्को के लिए रवाना होने से पूर्व नई दिल्ली में प्रधानमंत्री ने बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-रूस संबंधों को 'शांति और स्थिरता का एक कारक' बताया।
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि मेरा दौरा रूस के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम होगा और इस तथ्य को बल देगा कि बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी शांति और स्थिरता का एक कारक है।"
सिंह ने कहा, "दोनों देशों की साझेदारी लंबी मित्रता की मजबूत नींव पर आधारित है। वर्षो के संयुक्त प्रयासों से भारत और रूस के बीच के बहुक्षेत्रीय सहयोग में अधिक गहराई और परिपक्वता आई है। हम इसे और मजबूत करना चाहते हैं।"
इससे पहले प्रधानमंत्री ने इस साल जून में ब्रिक देशों (भारत, ब्राजील, रूस और चीन) और शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में मेदवेदेव से मिले थे। मेदवेदेव ने दिसंबर 2008 में भारत का दौरा किया था।
रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव के साथ वार्ता की कार्यसूची के बारे में सिंह ने कहा कि वह रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हाइड्रोकार्बन सहित अन्य क्षेत्रों में मौजूदा सहयोग की समीक्षा करेंगे।
मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं राष्ट्रपति के साथ आतंकवाद, वैश्विक मंदी की समाप्ति, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, परमाणु नि:शस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करुं गा।"
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध, मीडिया और बौद्धिक हलकों सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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