राजगीर महोत्सव में गजल सरताज गुलाम अली ने बांधा समां
राजगीर महोत्सव के पहले दिन उद्घाटन के बाद नृत्य और संगीत से राजगीर की वादियां गूंजती रहीं। गजल सरताज गुलाम अली ने 'दिल को तूने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा मैंने तूझे याद किया' से लोगों को मौसम में ठंडी हवा का एहसास कराया तो वर्ष 1983 की फिल्म 'निकाह' के गाने 'चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है' ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
गजल सरताज एक के बाद एक गजल गाकर लोगों को झुमाते रहे और तालियां बटोरते रहे। 'दिल में एक लहर सी उठी है अभी,कोई ताजा हवा चली है अभी' ने दर्शकों की रात को रंगीन बना दिया। गुलाम अली के साथ तबले पर अरशद खां तथा सितार पर जनाब खादिल खां ने संगत की।
बिहार के राजगीर में दो दिनों तक चलने वाले राजगीर महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार शाम को किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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