राजखोवा 12 दिनों की पुलिस हिरासत में (लीड-3)
राजखोवा, बरुआ और बोरा तीनों को यहां के मुख्य दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ले जाते समय तीनों को हथकड़ी पहनाई गई थी।
अदालत कक्ष में ले जाते समय राजखोवा ने भारत सरकार के उस दावे कि उसने आत्मसमर्पण किया है, को खारिज किया।
राजखोवा ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने आत्मसमर्पण नहीं किया है और समर्पण कभी नहीं करूंगा।"
राजखोवा और बरुआ ने शुक्रवार को बड़े ही नाटकीय ढंग से अपने परिजनों सहित मेघालय में समर्पण कर दिया था। आत्मसमर्पण करने वालों में राजखोवा और उसकी पत्नी कावेरी व दो बच्चे, राजू बरुआ और उसकी पत्नी और एक बच्चा, राजखोवा का निजी सुरक्षाकर्मी राजा बोरा एवं उल्फा के स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी की पत्नी व उनका पुत्र शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले उल्फा नेताओं को हेलीकॉप्टर के जरिए गुवाहाटी लाया गया। इन लोगों को असम पुलिस की चौथी बटालियन के मुख्यालय में रखा गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उल्फा नेताओं की पत्नी और बच्चों को नहीं गिरफ्तार किया गया है और इन लोगों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है।
वरिष्ठ वकील बिजोन महाजन ने आईएएनएस से कहा, "राजखोवा और बरुआ के परिजनों ने हमसे कानूनी मदद के लिए संपर्क किया था और हम उन्हें कानूनी सहायता मुहैया करा रहे हैं।"
उल्फा नेताओं से शुक्रवार को मुलाकात करने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने राजखोवा को संतुलित और शांत व्यक्ति बताया है।
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने उल्फा नेताओं के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे राज्य में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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