सेलफोन से नहीं होता मस्तिष्क का कैंसर : रिपोर्ट
इस विषय पर शोध करने वाले कोपेनहेगन स्थित इपिडिमियोलॉजी कैंसर संस्थान की शोध टीम की प्रमुख आईसाबेल डेल्टूर ने गुरुवार को कहा कि मोबाइल फोन से मस्तिष्क कैंसर नहीं होता।
डेल्टूर ने कोपेनहेगेन में कनाडा के एक टेलीविजन चैनल को बताया कि मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है।
डेल्टूर की यह रिपोर्ट 1974 से 2003 के बीच लोगों पर किए गए शोध पर आधारित है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि मोबाइल फोन के उपयोग से इसके उपयोगकर्ताओं में मस्तिष्क कैंसर होने का खतरा नहीं है।
डेल्टूर ने कहा, "हम यह पता नहीं लगा सके कि मोबाइल फोन के प्रभाव से मस्तिष्क कैंसर होने की कोई घटना सामने आई है।"
डेल्टूर ने बताया कि उनके शोध में फिनलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन के 1.6 करोड़ मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं को शामिल किया गया।
इस शोध से पता चला कि इनमें से 60,000 लोगों में ही ब्रेन ट्यूमर विकसित हुए। ब्रेन ट्यूमर विकसित होने की यह दर मोबाइल फोन का उपयोग शुरू होने से पहले इस बीमारी के विकसित होने के दर ज्यादा नहीं है।
शोध में यह भी पता लगाया गया कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से किसी तरह के खतरे में वृद्धि नहीं हुई और यदि ऐसा कोई खतरा था भी तो वह बहुत सूक्ष्म था जिसे देख पाना मुश्किल था या इस खतरे को पता लगाने के लिए अध्ययन की अवधि पर्याप्त नहीं थी।
शोध में हालांकि यह भी कहा गया कि ब्रेन ट्यूमर विकसित होने के लिए अधिक वक्त लगता है। इस लिहाज से शोध में शामिल अवधि के दौरान इस बात का ठीक तरह से पता नहीं चल सका।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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