तमार पर टिकी हैं निगाहें
नित्यानंद शुक्ला
तमार(झारखंड), 28 नवंबर (आईएएनएस)। यह छोटा सा शहर इस साल के शुरू में तब देश के सियासी नक्शे पर चमका था जब झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को यहां एक उप-चुनाव में शिकस्त खाने के बाद कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। एक बार फिर सब की निगाहें तमार पर लगी हैं, पर इस बार वजह दूसरी है।
सोरेन को कम जनाधार वाली झारखंड पार्टी के गोपाल कृष्ण पाटर उर्फ राजा पीटर ने 9000 से अधिक मतों से शिकस्त देकर कुर्सी से दूर होने को बाध्य कर दिया था। राज्य की उस नाटकीय राजनीतिक घटना के करीब11 महीने बाद एक बार फिर सभी की निगाहें इस क्षेत्र पर लगी हैं। यहां दो दिसंबर को चुनाव होगा और यहां के उम्मीदवार एवं मतदाता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के स्वयंभू क्षेत्रीय कमांडर कुंदन पाहन के इरादे को लेकर आशंकित हैं। कई दुस्साहसिक कारनामों को अंजाम दे चुका यह शख्स कैसी कार्रवाई करेगा, इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
पाहन गिरोह पर वरिष्ठ जद-यू नेता एवं तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या का आरोप है। उनकी हत्या जुलाई, 2008 में हुई थी। उनकी हत्या के कारण खाली हुई सीट को भरने के लिए जो उपचुनाव कराया गया था उसमें सोरेन हार गए थे।
पाहन की शैली पुलिस की गोलियों के शिकार बने चंदन तस्कर वीरप्पन से मिलती-जुलती है। राज्य खुफिया अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह चुनाव के दौरान खूनी कार्रवाई कर सकता है, क्योंकि इसका अतीत ऐसी ही कार्रवाइयों को अंजाम देने का रहा है।
रांची, खुंटी और जमशेदपुर जिलों में 50 किलोमीटर से अधिक बड़े दायरे में इस गिरोह का दबदबा है। कहा जाता है इस इलाके में उसका हुक्म चलता है। इसी गिरोह पर स्पेशल शाखा के निरीक्षक फ्रांसिस इंदुवार का अपहरण कर उनका सर कलम करने का आरोप है। पिछले 15 महीनों में इस इलाके में 20 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की हत्या की जा चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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