गैर-राजनीतिक है मेरी यात्रा: दलाई लामा

दलाई लामा ने यहां एक संग्रहालय के उद्धाटन करने के बाद पत्रकारों से कहा, "यह चीन के लिए आम बात है कि मैं जहां भी जाता हूं, वह मेरे खिलाफ प्रचार करता है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार का वह दावा पूरी तरह आधारहीन है कि मैं अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा दे रहा हूं।"
तवांग में जोरदार स्वागत
इससे पहले उनके तवांग पहुंचने पर लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। दलाई लामा के हजारों अनुयायी दुनिया के कोने-कोने से यहां पहुंचे हैं। हजारों स्थानीय लोगों ने पारंपरिक अंदाज में आध्यात्मिक गुरु का स्वागत किया।
तवांग से आठ किलोमीटर की दूरी पर हेलीपैड बना था। यहां से लेकर तवांग तक सड़कों के दोनों ओर लोग अपने आध्यात्मिक नेता का स्वागत करने के लिए कतार बना कर खड़े थे। दलाई लामा सुबह 7.45 बजे नई दिल्ली से असम के मुख्य शहर गुवाहाटी पहुंचे। इसके बाद वह अरूणाचल पहुंचे।
खासे उत्साहित हैं दलाई लामा
वरिष्ठ बौद्ध आध्यात्मिक नेता और पूर्व मंत्री टी.जी. रिंपोचे ने बताया, "दलाई लामा अरूणाचल पहुंचकर बहुत खुश हैं।" उन्होंने भी दलाई लामा का हवाई अड्डे पर स्वागत किया। तवांग के मठ में दलाई लामा का धार्मिक ढंग से स्वागत करने के लिए लगभग 800 भिक्षु मौजूद थे। एक भिक्षु सरवांग लामा ने कहा, "हम दलाई लामा को यहां पाकर बहुत उत्साहित हैं।" नोबले पुरस्कार विजेता दलाई लामा की अगुवानी के लिए अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू भी मठ में मौजदू थे।
मठ से जुड़े गुरु टुकू ने कहा, "दलाई लामा सोमवार को मठ के निकट एक स्कूल के मैदान में होने वाले प्रार्थना सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी।" गौरतलब है कि चीन ने मांग की थी कि भारत दलाई लामा को अरूणाचल दौरे की इजाजत न दे। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दलाई लामा के कहीं भी आने-जाने पर नियंत्रण नहीं लगा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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