'भारत में फैल सकता है पाक का आतंक'

केंद्रीय गृह सचिव जीकेपिल्लई ने बेंगलुरू में बिशप कॉटन स्कूल के पूर्व छात्रों के एक समारोह में कहा, "मैं सोचता हूं कि पाकिस्तान में जारी आतंकी हमले की स्थितियां कुछ हद तक भारत में भी प्रवेश कर सकतीं हैं। पाकिस्तान में जिस तरह से उथल-पुथल मची हुई है, हमें पूरी तरह सतर्क व किसी हमले की स्थिति में उससे मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार रहना है।"
किसी भी हमले से निपटने को तैयार
'भारतीय सुरक्षा : चुनौतियां और प्रतिक्रियाएं' विषय पर जनरल के.एस. थिमाया स्मृति पांचवीं व्याख्यान माला में पिल्लई ने कहा कि पिछले वर्ष 26 नवंबर को मुबई में हुए आतंकी हमले के बाद से देश किसी भी हमले का मुकाबला करने के लिए पहले से बेहतर रूप में तैयार है।
पिल्लई ने एक एक सवाल के जवाब में कहा, "यदि आप मुझसे पूछेंगे कि क्या हम पूरी तरह तैयार हैं तो इसका जवाब होगा नहीं। हम क्षमता बढ़ा रहे हैं और अपने खुफिया तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। यह सिर्फ सरकार, सुरक्षा बलों और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए हर व्यक्ति को सतर्क रहना है।"
कश्मीर के रास्ते घुस सकते हैं तालिबानी
दूसरी ओर उत्तरी कमान के कमान अधिकारी जनरल बी. एस जसवाल ने जम्मू एवं कश्मीर में तालिबान आतंकवादियों के प्रवेश की बात से तो इंकार किया, लेकिन उन्होंने कहा है कि यदि पाकिस्तान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो आतंकवादियों के प्रवेश की संभावनाएं बन सकती हैं।
जम्मू से 66 किलोमीटर दूर ऊधमपुर स्थित उत्तरी कमान के मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जसवाल ने कहा, "हम पाकिस्तान में स्थिरता चाहते हैं।" पाकिस्तान की अतिसंवेदनशील स्थिति, जहां आतंकवादी, नागरिकों को और रक्षा संस्थानों को तेजी से निशाना बना रहे हैं, की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति से जम्मू एवं कश्मीर और शेष भारत भी प्रभावित हो सकता है।
जसवाल ने कहा कि 2006 के बाद से कश्मीर में हिंसात्मक घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस साल अब तक हिंसा की केवल 36 घटनाएं हुई हैं, जबकि 2006 में हिंसा की 276 घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा कि घाटी में विरोध प्रदर्शन चिंता का मुख्य विषय है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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