महाराष्‍ट्र: मंत्रालयों को लेकर तनातनी

Ajit Pawar
मुबई। महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव तो हो गए, लेकिन असली खेल अब शुरू हुआ है। वो है मंत्रालयों के बंटवारे का। छगन भुजबल को उपमुख्‍यमंत्री चुने जाने के बाद से कांग्रेस के सहयोगी दलों में नाराजगी व्‍याप्‍त हो गई है। यही कारण है कि अब मंत्रालयों के बंटावारे को लेकर दलों के बीच तनातनी हो गई है।

शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने कांग्रेस पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। पार्टी के वरिष्‍ठ नेता अजित पवार ने साफ कहा है कि यदि कांग्रेस ने गृह, वित्‍त और ऊर्जा विभागों के आवंटन में 1999 का फार्मूला अपनाया तो वो नई सरकार में शामिल नहीं होंगे।

जो विभाग भाजपा को तब मिले थे, अब हमे चाहिए

अजित पवार का कहना है कि दोनों दलों के बीच ठीक उसी प्रकार विभागों का बंटवारा होना चाहिए, जैसा कि 1999 में हुआ था। उस समय कांग्रेस के पास वह मंत्रालय थे, जो 1995-96 के दौरान भगवा सरकार के दौरान शिवसेना के पास थे। इसलिए राकांपा को वे मंत्रालय मिलें जो स समय भाजपा के पास थे।

अजित पवार ने अपनी पार्टी तथा उन्‍हें समर्थन देने वाले निर्दलियों के लिए 21 विभागों की मांग की है। राजनीतिक गलियारे में चर्चा चल रही है कि छगन भुजबल को उपमुख्‍यंमत्री बनाए जाने पर अजित नाराज हैं, लेकिन मीडिया से बातचीत के दौरान अजित ने साफ कहा कि वो इस बात से नाराज नहीं हैं। मीडिया ने मेरे नाराज होने की अफवाह उड़ाई है। इसक अलावा उन्‍होंने कहा, "मंत्रीपद किसे देना है, किसे नहीं यह पार्टी तय करेगी। मैं मंत्रीपद स्वीकारूंगा कि नहीं, इस पर फिलहाल मैं कुछ भी नहीं कहूंगा। हां, पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसे जरूर पूरा करने के प्रयास करूंगा।"

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