भारत, रूस और चीन की अहम् बैठक

भारत, रूस और चीन की अहम् बैठक

विश्व की तीन तेज़ी से उभरती हुई आर्थिक महाशक्तियां रूस, भारत और चीन अपने आपसी समबन्धों को और भी मज़बूत करने और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम् कदम उठा रहे हैं और उनके विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आज भारत की सिलिकॉन वेली कहे जाने वाले बंगलुरु में होने जा रही है.

बैठक से पहले प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा की त्रिपक्षीय बैठक सुबह दस बजे शुरू होगी. बैठक के बाद तीनों देशों का एक साझा घोषणा पात्र जारी किया जायेगा जिस में बताया जायेगा कि कौन कौन से मुद्दों पर क्या बात चीत हुई और क्या परिणाम निकला.

वैसे उन्होंने कहा की इस बैठक में तीनो देश क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर और वाणिज्य और आर्थिक क्षेत्र में आपसी सहयोग पर विचार विमर्श करेंगे. इस त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विदेश मंत्री यांग जेईची और रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव अपने वरिष्ठ अधिकारियों के दलों के साथ बंगलुरु पहुंच गए हैं जहाँ उनके लिए खास सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.

भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा पहले से बंगलुरु में इस बैठक की तैयारियां कर रहे थे. यह बैठक बंगलुरु के एक पांच सितारा होटल लीला केम्पेंस्की में हो रही है. हालाँकि इससे पहले इन तीन देशों के विदेश मंत्रियों की ऐसी नौ बैठकें हो चुकी हैं लेकिन बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जब विश्व पर आर्थिक संकट का ग्रहण आ गया है और आतंकवाद की समस्या जटिल और पेचीदा होती जा रही है, यह बैठक ज़्यादा अहम् बन गयी है. त्रिपक्षीय बैठक के बाद शाम में एक और महत्वपूर्ण मुलाकात भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच हो रही है.

यह दो तरफा मुलाक़ात इस लिए भी अहम् होगी क्योंकि हाल के दिनों में भारत और चीन के संबंधों में कड़वाहट बढ़ गयी है.

चीन ने एक ओर प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्ति जताकर यह संकेत देने की कोशिश की की वो इस भारतीय प्रदेश पर भी अपना दावा रखता है. दूसरी और चीन ने तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश के प्रस्तावित दौरे पर भी ऐतराज़ किया है.

हालांकि भारत ने इन दोनों ही आपत्तियों को रद्द कर दिया है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अटूट अंग बताया है और साथ ही दलाई लामा को भी अरुणाचल प्रदेश जाने की अनुमति दे दी है लेकिन इस दो तरफा भेंट पर इन सभी विवादों का साया पड़ता दिखाई दे रहा है. भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा इस बैठक को लेकर काफी आशावादी है.

उन्होंने कहा है कि भारत और चीन के संबंध दिनोंदिन बेहतर हो रहे है और आपसी सहयोग बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों ही महतवपूर्ण देश हैं इस लिए उन्हें बहुत ही फूँक फूँक कर कदम रखने की ज़रुरत है. यह भी एक दिलचस्प बात है की विदेशी नीति से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में सत्ता के गलियारों से दूर बंगलुरु में हो रही है.

आज से 23 वर्ष पहले बाघों के इस शहर ने सार्क शिखर सम्मलेन की बैठक की थी जिस में राजीव गाँधी ने भारत की अगवाई की थी. इस बार माना जा रहा है कि एस एम कृष्णा की पहल पर यह बैठक बंगलुरु में हो रही है क्योंकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने इस नगर के विकास में एक अहम् भूमिका निभाई थी.

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