उद्धव ने हार की नैतिक जिम्मेदारी ली

उन्होंने कहा कि पार्टी एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका का निर्वाह करेगी, सबको न्याय मिले यह कोशिश होगी और यदि जरूरत पड़ी तो पार्टी हिन्दुत्व के मुद्दे को भी उठाएगी। उद्धव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उपयुक्त मुद्दे उठाए थे। उन्होंने कहा कि शिव सेना की हार राज्य की जनता की हार है।
अपेक्षा के विपरीत मिले परिणाम
पार्टी के प्रदर्शन को अपेक्षा के विपरीत करार देते हुए उन्होंने कहा, "हमने हमेशा मराठियों के हित की लड़ाई लड़ी और भविष्य में भी लड़ते रहेंगे। कोई भी ताकत राज्य की मराठी जनता को शिव सेना और बाल ठाकरे से अलग नहीं कर सकती।"
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए उनका नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, "जिसने विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीती हैं, उनका क्या योगदान रहा है।" उद्धव ने कहा, "चुनावी हार से हम हताश नहीं है। मेरी नेतृत्व क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।"
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "पार्टी की मुख्य लड़ाई कांग्रेस से है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हमारा कोई मतभेद नहीं है।" चुनावी हार के बाद शिव सेना के मुखपत्र सामना में छपे बाल ठाकरे के संपादकीय में व्यक्त विचारों को उद्धव ने उचित ठहराया। ठाकरे ने इसमें शिव सेना की हार के लिए जनता को कोसा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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