आगरा शिखर बैठक का बहिष्कार चाहते थे मुशर्रफ

मुशर्रफ ने न्यूयार्क में संवाददाताओं को बताया कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने शिखर बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त घोषणापत्र में कश्मीर का उल्लेख करने की बात दो बार नकार दी।
मीडिया को भी बताना चाहते थे यह बात
मुशर्रफ के अनुसार उनमें और वाजपेयी में यह तय हुआ था कि संयुक्त घोषणापत्र में कहा जाएगा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित मसला है और उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री ऐन मौके पर पीछे हट गए। मुशर्रफ ने बताया कि मामूली बदलावों के साथ साझा घोषणापत्र का दूसरा मसौदा तैयार किया गया, लेकिन वाजपेयी उससे भी पीछे हट गए।
'द न्यूज' के अनुसार, मुशर्रफ ने संवाददाताओं को बताया, "मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया और मैं उसी समय वहां चला जाना चाहता था लेकिन विदेश सचिव की सलाह पर मैंने ऐसा नहीं किया।" उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में प्रेस को भी बताना चाहता था लेकिन ऐसा भी नहीं कर सका क्योंकि प्रेस को मेरे होटल तक आने की इजाजत नहीं थी और हम सुरक्षा कारणों से प्रेस तक जा नहीं सकते थे।"
'मैं तो सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष था'
पाकिस्तान के इस पूर्व सैनिक तानाशाह ने वर्ष 2006 में बलूच नेता अकबर खान बुगती की हत्या के मामले से भी दूरी बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि वह उन दिनों सरकार नहीं चला रहे थे, बल्कि सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष थे।
मुशर्रफ ने कहा कि उन्हें इस हत्याकांड के लिए आरोपी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि बलूचिस्तान में मुख्यमंत्री और देश में प्रधानमंत्री के हाथ प्रशासन की बागडोर थी। बुगती की हत्या के सिलसिले में मुशर्रफ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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